दिल्ली की सड़कों पर फिर ‘निर्भया’ जैसी दरिंदगी: रानी बाग में चलती स्लीपर बस में महिला के साथ गैंगरेप, पुलिस ने दो दरिंदों को दबोचा

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर शर्मसार हुई है। दिल्ली के रानी बाग इलाके से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने 14 साल पुराने निर्भया कांड की कड़वी यादों को ताजा कर दिया है। सोमवार की देर रात एक निजी स्लीपर बस के भीतर 30 वर्षीय महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य घटना को अंजाम दिया गया। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने चलती बस को ही अपराध का अड्डा बना लिया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और वारदात में इस्तेमाल की गई बस को भी अपने कब्जे में ले लिया है। इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा और रात के समय सड़कों पर चलने वाली निजी बसों की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

अपहरण और फिर चलती बस में हैवानियत

​वारदात की शुरुआत सोमवार की देर रात हुई, जब दिल्ली के रानी बाग इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ था। जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला अपने गंतव्य की ओर जा रही थी, तभी आरोपियों ने उसे अकेला पाकर जबरन एक निजी स्लीपर बस के भीतर खींच लिया। बस के भीतर घुसते ही आरोपियों ने वैन के दरवाजे बंद कर दिए और उसे तेज रफ्तार से सड़क पर दौड़ाने लगे। 30 वर्षीय पीड़िता ने खुद को बचाने का काफी प्रयास किया, लेकिन आरोपियों की ताकत और हथियारों के डर के आगे उसकी एक न चली।

​आरोपियों ने चलती बस के केबिन और स्लीपर बर्थ का इस्तेमाल इस घिनौने कृत्य के लिए किया। पीड़िता के साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि उसके साथ सामूहिक रूप से दरिंदगी की गई। अपराधियों ने बस को इस तरह से चलाया ताकि सड़क पर किसी को भी भीतर हो रही हलचल का अंदाजा न हो सके। पीड़िता किसी तरह उन दरिंदों के चंगुल से बाहर निकलने में सफल रही। उसने हिम्मत नहीं हारी और सीधे नजदीकी पुलिस स्टेशन पहुँचकर आपबीती सुनाई। महिला की हालत नाजुक थी, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत उसे चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई और उसके बयान के आधार पर मामला दर्ज किया।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: चंद घंटों में सलाखों के पीछे अपराधी

​मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों ने विशेष टीम का गठन किया। पीड़िता द्वारा बताए गए बस के हुलिए और संभावित मार्ग के आधार पर रानी बाग इलाके और आसपास के क्षेत्रों में नाकेबंदी की गई। तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय मुखबिरों की सहायता से पुलिस ने उस निजी स्लीपर बस की पहचान कर ली। पुलिस ने छापेमारी कर दोनों आरोपियों को धर दबोचा। आरोपियों की पहचान अभी गुप्त रखी गई है ताकि शिनाख्त परेड (TIP) की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

​पुलिस ने वह निजी स्लीपर बस भी जब्त कर ली है, जिसमें इस शर्मनाक घटना को अंजाम दिया गया था। जांच के दौरान यह पाया गया कि बस एक निजी ऑपरेटर द्वारा चलाई जा रही थी। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या बस के पास वैध परमिट था और क्या वह अपने निर्धारित रूट पर चल रही थी। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या इस साजिश में बस का चालक, क्लीनर या कोई अन्य बाहरी व्यक्ति भी शामिल था।

फॉरेंसिक जांच और सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी टीमें

​वारदात के बाद फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को भी बुलाया गया। विशेषज्ञों ने जब्त की गई बस के भीतर से महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं। बस के भीतर मिले फिंगरप्रिंट्स, कपड़ों के रेशे और अन्य जैविक साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ अदालत में मजबूत सबूत साबित होंगे। पुलिस का मानना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस केस को ‘वॉटरटाइट’ बनाया जा सकता है ताकि अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिल सके।

​इसके साथ ही, पुलिस की एक अलग टीम रानी बाग और उन तमाम रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, जहाँ से वह बस गुजरी थी। सीसीटीवी फुटेज से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि महिला को किस जगह से बस में चढ़ाया गया और उस समय बस के भीतर कितने लोग मौजूद थे। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या बस को किसी खास पैटर्न में चलाया जा रहा था ताकि उसे पुलिस की गश्ती गाड़ियों की नजरों से बचाया जा सके। तकनीकी साक्ष्य इस मामले में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

सुरक्षा के दावों पर फिर उंगली: निजी बसों की अनियंत्रित आवाजाही

​इस घटना ने दिल्ली में निजी बसों के संचालन और उनमें सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की पोल खोल दी है। स्लीपर बसों में आमतौर पर केबिन बंद होते हैं, जिसका फायदा अक्सर अपराधी उठाते हैं। रानी बाग जैसी जगह पर चलती बस में ऐसी वारदात होना यह दर्शाता है कि रात के समय पुलिस की गश्त को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। स्थानीय निवासियों में भी इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर राजधानी की सड़कों पर बसें सुरक्षित नहीं हैं, तो महिलाएं खुद को कहाँ सुरक्षित महसूस करेंगी?

​दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले में स्पीडी ट्रायल की मांग करेंगे। जांच एजेंसियां पीड़िता के बयान और तकनीकी साक्ष्यों को एक कड़ी में जोड़कर चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही हैं। यह भी जांच का विषय है कि बस में जीपीएस (GPS) लगा था या नहीं और क्या उसके माध्यम से बस की मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा था। पुलिस ने बस मालिक को भी पूछताछ के लिए तलब किया है ताकि यह पता चल सके कि उसने किन परिस्थितियों में इन लोगों को बस सौंपी थी।

जांच के दायरे में कई अनसुलझे सवाल

​फिलहाल पुलिस आरोपियों से सघन पूछताछ कर रही है। आरोपियों का पिछला आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वे पहले भी इस तरह की वारदातों में शामिल रहे हैं। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों ने वारदात से पहले महिला की रेकी की थी या यह एक तात्कालिक अपराध था। पीड़िता की काउंसलिंग भी कराई जा रही है ताकि वह इस सदमे से बाहर आ सके।

​दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही है। आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म (376D) और अपहरण (365) जैसी संगीन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में पुलिस कुछ अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ कर सकती है। इस मामले की गूंज राजनीतिक गलियारों में भी सुनाई दे रही है, जहाँ विपक्षी दल सत्ता पक्ष से महिलाओं की सुरक्षा पर जवाब मांग रहे हैं। जांच टीमें अब बस के परमिट और लॉग बुक की जांच कर रही हैं ताकि वारदात के सटीक समय और स्थान की पुष्टि की जा सके।

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