दिल्ली इमारत हादसे में बिहार के दो होनहार इंजीनियरों की मौत, परिवारों में पसरा मातम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सैदुलाजाब इलाके में हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने बिहार के दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में बिहार के दो युवा इंजीनियरों की मौत हो गई, जिनकी पहचान नवादा जिले के नलिन और मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के पूर्व छात्र कपिल के रूप में हुई है। हादसे की खबर मिलते ही दोनों परिवारों में मातम छा गया है, जबकि पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

शनिवार को हुए इस भीषण हादसे में कुल छह लोगों की जान चली गई। मृतकों में बिहार के ये दो प्रतिभाशाली इंजीनियर भी शामिल हैं, जो अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने संजोए दिल्ली में रह रहे थे।

आईईएस की तैयारी कर रहा था नलिन

जानकारी के अनुसार नवादा जिले की डोहढ़ा पंचायत निवासी नलिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली में रहकर इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज (आईईएस) की तैयारी कर रहा था। परिवार और गांव के लोगों को उससे काफी उम्मीदें थीं।

नलिन के ममेरे भाई सोनू ने बताया कि नलिन ने मुजफ्फरपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की थी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटा हुआ था। रविवार को उसका पराठा खाने का मन हुआ, जिसके बाद वह अपने एक दोस्त के साथ हॉस्टल से कुछ दूरी पर स्थित एक कैंटीन में पहुंचा था।

इसी दौरान कैंटीन के पास स्थित एक भवन अचानक भरभराकर गिर पड़ा। देखते ही देखते मलबे का बड़ा हिस्सा आसपास मौजूद लोगों पर आ गिरा। नलिन और उसका दोस्त भी इसकी चपेट में आ गए। गंभीर रूप से घायल होने के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

नलिन के पिता किसान हैं और बेटे की सफलता को लेकर बड़े सपने देख रहे थे। बेटे की असमय मौत की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

वैज्ञानिक बनने का सपना देख रहे थे कपिल

हादसे में जान गंवाने वाले दूसरे युवा इंजीनियर कपिल भी बिहार के रहने वाले थे। हालांकि उनके मूल निवास स्थान की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। कपिल भी मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पूर्व छात्र थे और अपने करियर को नई दिशा देने की तैयारी कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि कपिल हाल ही में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) में वैज्ञानिक पद के लिए इंटरव्यू देकर आए थे। इंटरव्यू अच्छा होने से वह काफी उत्साहित थे और इसी खुशी में अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने कैंटीन पहुंचे थे।

खुशी का पल मातम में बदला

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कपिल, नलिन और उनके अन्य दोस्त कैंटीन में एक साथ बैठे हुए थे। बातचीत और जश्न का माहौल था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों में सब कुछ बदल जाएगा।

अचानक पास की इमारत भरभराकर गिर गई और कैंटीन समेत आसपास का इलाका मलबे में तब्दील हो गया। हादसा इतना भयावह था कि कई लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कपिल, नलिन और अन्य लोग मलबे के नीचे दब गए।

राहत एवं बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का काम शुरू किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। कई लोगों को मृत अवस्था में बाहर निकाला गया।

एमआईटी के पूर्व छात्रों में शोक

नलिन और कपिल दोनों मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पूर्व छात्र थे। उनके निधन की खबर मिलते ही संस्थान के पूर्व छात्रों, शिक्षकों और साथियों में शोक की लहर फैल गई।

दोनों को मेहनती, प्रतिभाशाली और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्र बताया जा रहा है। साथ पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि दोनों अपने क्षेत्र में बेहतर भविष्य बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे।

परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

जिस उम्र में दोनों युवाओं को अपने करियर की नई ऊंचाइयों को छूना था, उसी उम्र में उनकी जिंदगी एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गई। परिवारों को अब भी इस घटना पर विश्वास नहीं हो रहा है।

नलिन और कपिल की मौत ने एक बार फिर जर्जर और असुरक्षित इमारतों की समस्या को सामने ला दिया है। यह हादसा न केवल दो परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि उन तमाम युवाओं के सपनों का भी अंत है जो देश के विकास में अपनी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे थे।

दिल्ली के इस दर्दनाक हादसे ने पूरे बिहार को शोक में डुबो दिया है। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर इन होनहार युवाओं की जान जाने का जिम्मेदार कौन है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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