बिहार में शराबबंदी पर फिर छिड़ी बहस, मांझी ने कानून की समीक्षा की उठाई मांग

पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर शराबबंदी कानून को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एनडीए के सहयोगी दल के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग दोहराते हुए कहा है कि इस विषय पर नई सरकार बनने के बाद विचार किया जा सकता है।

पटना पहुंचने पर मीडिया से बातचीत के दौरान मांझी से जब यह सवाल पूछा गया कि क्या बिहार में शराबबंदी खत्म की जा सकती है, तो उन्होंने सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर आने वाले समय में नई सरकार निर्णय लेगी और उसी के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।

दरअसल, बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून को लेकर पहले भी कई बार बहस होती रही है। मांझी का कहना है कि इस कानून के लागू होने के बाद कई जगहों पर गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पहले भी कहा है कि समाज के संपन्न लोग अक्सर कानून से बच निकलते हैं जबकि छोटे और गरीब लोग कार्रवाई का ज्यादा शिकार बनते हैं।

बिहार विधानसभा के हालिया बजट सत्र के दौरान भी शराबबंदी कानून की समीक्षा का मुद्दा उठाया गया था। कुछ अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस कानून की प्रभावशीलता और इसके सामाजिक असर को लेकर चर्चा की जरूरत बताई थी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य की बदलती सियासी परिस्थितियों के बीच शराबबंदी का मुद्दा आने वाले समय में फिर से राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है। हालांकि सरकार की ओर से इस कानून में किसी बड़े बदलाव को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

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