दरभंगा में गन्ना खेती बढ़ाने की बड़ी पहल, नई चीनी मिलों को पर्याप्त आपूर्ति के लिए शुरू होगा व्यापक अभियान

पटना/दरभंगा: दरभंगा जिले में गन्ना उत्पादन को नई गति देने और सकरी तथा रैयाम में स्थापित हो रही नई चीनी मिलों के लिए पर्याप्त गन्ने की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। किसानों की आय बढ़ाने, खेती के रकबे का विस्तार करने और चीनी उद्योग को मजबूत आधार प्रदान करने के उद्देश्य से जिले में “गन्ना क्षेत्र विस्तार अभियान 2026” को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस अभियान के तहत प्रशासनिक स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक समन्वित प्रयास किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक किसान गन्ने की खेती अपनाएं और उन्हें उत्पादन से लेकर विपणन तक हर स्तर पर आवश्यक सहायता मिल सके।

सरकार का मानना है कि यदि गन्ना उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है तो इसका सीधा लाभ किसानों के साथ-साथ क्षेत्र की नई चीनी मिलों को भी मिलेगा। इसी सोच के साथ कृषि, गन्ना उद्योग, सहकारिता और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को एक साझा मंच पर लाकर अभियान को गति देने की रणनीति बनाई गई है। सभी विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं ताकि अभियान केवल कागजों तक सीमित न रहकर खेतों तक पहुंचे और किसानों को वास्तविक लाभ मिल सके।

अभियान की शुरुआत से पहले राज्य स्तर पर उच्च अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए विस्तृत रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में यह तय किया गया कि जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर पर गठित समितियां पूरी सक्रियता के साथ कार्य करेंगी। साथ ही किसानों को गन्ने की खेती से मिलने वाले आर्थिक लाभ, आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि किसानों को किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।

इसी क्रम में दरभंगा जिला प्रशासन ने भी अभियान को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर स्थानीय स्तर पर कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया। बैठक में कृषि विभाग, सहकारिता विभाग और गन्ना उद्योग विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया तथा सकरी और रैयाम चीनी मिल क्षेत्र में गन्ने की उपलब्धता बढ़ाने के लिए आवश्यक कदमों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि वे केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और खेतों में जाकर किसानों से सीधा संवाद स्थापित करें और उन्हें गन्ना खेती के लिए प्रेरित करें।

अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए चार स्तरों पर समितियों का गठन किया गया है। राज्य स्तर पर नीतिगत निर्णय और निगरानी की जिम्मेदारी रहेगी, जबकि जिला स्तर पर अभियान के संचालन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। प्रखंड स्तर की समितियां स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किसानों से संपर्क स्थापित करेंगी और पंचायत स्तर पर गठित टीम घर-घर जाकर किसानों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ उनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करेगी। इस बहुस्तरीय व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी किसान तक सरकारी सहायता पहुंचने में देरी न हो।

गन्ना उद्योग विभाग को अभियान का प्रमुख समन्वयक बनाया गया है, जबकि कृषि विभाग आधुनिक खेती की तकनीकों, उन्नत बीजों और उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी किसानों तक पहुंचाएगा। सहकारिता विभाग किसानों को आवश्यक संसाधनों और सुविधाओं से जोड़ने में सहयोग करेगा। वहीं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग गांव-गांव तक जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को गन्ने की खेती के आर्थिक लाभ और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देगा। इस समन्वित प्रयास से अधिक किसानों को गन्ना उत्पादन से जोड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू किसानों तक सीधे पहुंच बनाना है। अधिकारियों और क्षेत्रीय कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे नियमित रूप से गांवों का भ्रमण करें, किसानों के खेतों का निरीक्षण करें और उनकी समस्याओं को मौके पर ही दूर करें। यदि किसी किसान को बीज, खाद, सिंचाई, तकनीकी सलाह या अन्य किसी सुविधा की आवश्यकता होगी तो संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई करेगा। इससे किसानों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और खेती से जुड़ी बाधाएं समय रहते दूर हो सकेंगी।

सरकार का मानना है कि गन्ना एक ऐसी नकदी फसल है जो किसानों को बेहतर आमदनी देने की क्षमता रखती है। यदि आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों से इसकी खेती की जाए तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। इसी कारण अभियान के दौरान किसानों को उन्नत किस्मों के चयन, संतुलित उर्वरक उपयोग, सिंचाई प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा फसल की देखभाल से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी भी दी जाएगी। विशेषज्ञ किसानों को प्रशिक्षण देकर उत्पादन लागत कम करने और अधिक लाभ अर्जित करने के उपाय बताएंगे।

सकरी और रैयाम में नई चीनी मिलों की स्थापना से क्षेत्र के किसानों के लिए नई संभावनाएं भी खुल रही हैं। स्थानीय स्तर पर मिलों के संचालन से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। परिवहन लागत कम होगी और समय पर गन्ने की खरीद होने से किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

प्रशासन का लक्ष्य केवल गन्ना क्षेत्र का विस्तार करना नहीं है, बल्कि किसानों और चीनी उद्योग के बीच मजबूत संबंध स्थापित करना भी है। इसके लिए समय-समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी और अभियान की प्रगति का आकलन किया जाएगा। जहां आवश्यकता होगी, वहां अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि अभियान निर्धारित लक्ष्यों को समय पर हासिल कर सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान योजनानुसार सफल होता है तो दरभंगा आने वाले वर्षों में बिहार के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। इससे न केवल सकरी और रैयाम की नई चीनी मिलों को पर्याप्त कच्चा माल मिलेगा, बल्कि हजारों किसानों की आय में भी स्थायी वृद्धि होगी। सरकार और जिला प्रशासन को भरोसा है कि चारों विभागों के संयुक्त प्रयास, किसानों की सक्रिय भागीदारी और नियमित तकनीकी सहायता के बल पर गन्ना उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी तथा यह पहल जिले की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक नया अध्याय साबित होगी।

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