शिक्षक व को-ऑर्डिनेटर पद पर नौकरी के नाम पर 50 से अधिक छात्र-छात्राओं से लाखों की साइबर ठगी, साइबर थाने में मामला दर्ज

भागलपुर। शिक्षक और को-ऑर्डिनेटर पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर राष्ट्रीय बाल शिक्षा योजना के तहत 50 से अधिक छात्र-छात्राओं से लाखों रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगी के शिकार छात्र-छात्राएं शुक्रवार को बड़ी संख्या में भागलपुर साइबर थाना पहुंचे और मामले में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

ऑनलाइन आवेदन से लेकर नियुक्ति पत्र तक दिया गया झांसा

जानकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक फर्जी विज्ञापन के जरिए राष्ट्रीय बाल शिक्षा योजना के तहत 4 फरवरी से 20 जून तक ऑनलाइन आवेदन मंगाए गए थे। इसमें शिक्षक व को-ऑर्डिनेटर पदों की भर्ती की बात कही गई थी।

25 जून को आवेदकों को आईडी-पासवर्ड जारी कर ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए मैसेज भेजा गया। इसके बाद किसी न किसी बहाने दस्तावेजों में त्रुटि बता कर 10 से 15 हजार रुपये की मांग की गई। जैसे ही छात्रों ने यह रकम ऑनलाइन भेजी, उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र भी मेल या पोर्टल के माध्यम से भेजा गया।

40 हजार तक वसूले गए, फिर मोबाइल बंद कर भागे ठग

छात्रों का आरोप है कि प्रत्येक से 40 हजार रुपये से अधिक की वसूली की गई। दो दिन के भीतर ठगों ने अपने मोबाइल नंबर बंद कर लिए और सोशल साइट्स पर बने अकाउंट भी डिलीट कर दिए। कई छात्र-छात्राओं ने डायल 1930 पर भी शिकायत दर्ज कराई।

इन इलाकों के छात्र हुए शिकार

ठगी के शिकार छात्र पीरपैंती, कहलगांव, गोराडीह, नारायणपुर, शाहकुंड, बांका, नवगछिया, खरीक और सन्हौला सहित अन्य प्रखंडों से संबंधित हैं। पीड़ितों में कुंदन कुमार, आदित्य आनंद, अनंत कुमार ठाकुर, चंदना कुमारी, मृत्युंजय कुमार, विनिता सिंह सहित कई छात्र-छात्राएं शामिल हैं।

सरकारी प्रक्रिया जैसी रणनीति अपनाकर किया ठगी

छात्रों ने बताया कि साइबर ठगों ने सरकारी नौकरी जैसी पूरी प्रक्रिया अपनाई। ऑनलाइन फार्म, आईडी-पासवर्ड, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, इंटरव्यू और फिर फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर उन्हें भरोसे में लिया गया।


पुलिस ने शुरू की जांच, जल्द गिरोह का होगा पर्दाफाश

साइबर थाना पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद ठगी के इस मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स की मदद से फर्जी वेबसाइट, ट्रांजेक्शन और कॉल डिटेल्स की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में एक संगठित गिरोह के शामिल होने की आशंका है, जो युवाओं को नौकरी के नाम पर निशाना बना रहा था। जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।


 

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