गया | 27 फरवरी, 2026: गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात सीआईएसएफ (CISF) जवान मुकेश सिंह की हरियाणा पुलिस की कस्टडी में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने सुरक्षा महकमे और प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। जहाँ एक ओर पुलिस इसे ‘हार्ट अटैक’ बता रही है, वहीं परिजनों ने सीधे तौर पर पुलिस पर हत्या का आरोप लगाते हुए पूरी गिरफ्तारी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूरा मामला: गिरफ्तारी से मौत तक
मूल रूप से वैशाली जिले के रहने वाले मुकेश सिंह गया एयरपोर्ट पर अपनी ड्यूटी कर रहे थे। एक पुराने मामले के सिलसिले में हरियाणा पुलिस गया पहुँची और उन्हें अपनी कस्टडी में लिया। कुछ ही घंटों बाद खबर आई कि मुकेश सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे।
परिजनों का आरोप: “मेरे पिता स्वस्थ थे, पुलिस ने मार डाला”
मृतक के पुत्र नीलेश सिंह और उनकी पत्नी ने पुलिस के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
- बिना वारंट गिरफ्तारी: परिजनों का दावा है कि हरियाणा पुलिस के पास कोई अरेस्ट वारंट नहीं था, उन्होंने जबरन हिरासत में लिया।
- हिरासत में टॉर्चर: बेटे नीलेश का कहना है कि उनके पिता पूरी तरह फिट थे और उन्हें हृदय संबंधी कोई समस्या नहीं थी। अचानक हार्ट अटैक की बात महज एक ‘कवर-अप’ स्टोरी है।
- FIR में आनाकानी: परिजनों ने मगध मेडिकल थाना में शिकायत दी है, लेकिन उनका आरोप है कि स्थानीय पुलिस केस दर्ज करने में टालमटोल कर रही है।
पुलिस का पक्ष: ‘कानूनी प्रक्रिया का हुआ पालन’
मगध मेडिकल थाना इंस्पेक्टर कृष्ण सिंह और डीएसपी टाउन टू धर्मेंद्र भारती ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है:
- सूचना: हरियाणा पुलिस ने सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों को विधिवत जानकारी और वारंट दिखाने के बाद ही मुकेश सिंह को कस्टडी में लिया था।
- कारण: प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण ‘हार्ट अटैक’ बताया जा रहा है।
अगला कदम: पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी नजरें
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का मानना है कि मेडिकल रिपोर्ट ही यह साफ कर पाएगी कि जवान की मौत प्राकृतिक थी या उनके साथ कोई ज्यादती हुई थी। इस घटना के बाद गया पुलिस और सीआईएसएफ प्रशासन के बीच भी तनाव और हलचल बढ़ गई है।
VOB का नजरिया: कस्टोडियल डेथ पर जवाबदेही तय हो!
चाहे मामला कितना भी पुराना क्यों न हो, एक अनुशासित बल (CISF) के जवान की पुलिस हिरासत में मौत होना बेहद गंभीर मामला है। ‘हार्ट अटैक’ का तर्क अक्सर हिरासत में हुई मौतों के बाद सबसे पहले दिया जाता है। अगर परिजनों के आरोप सही हैं और बिना वारंट गिरफ्तारी हुई है, तो यह मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का खुला उल्लंघन है। गया पुलिस को इस मामले में निष्पक्षता बरतते हुए दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


