मधेपुरा में अपराधियों का तांडव! SH-58 पर बाइक सवार युवक को गोलियों से भूना; अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम

HIGHLIGHTS: चौसा-उदाकिशुनगंज रोड पर ‘खूनी’ वारदात; दहशत में रसलपुर धुरिया के ग्रामीण

  • वारदात: बुधवार की रात SH-58 पर घोषई की छोटी पुलिया के पास बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में की फायरिंग।
  • मृतक: धुरिया गोठ बस्ती निवासी 28 वर्षीय दिलखुश कुमार, पिता- नंदकिशोर यादव।
  • हमलावर: एक बाइक पर सवार थे तीन बदमाश; पीछे बैठे दिलखुश को पेट में मारी गोली।
  • एक्शन: उदाकिशुनगंज एसडीपीओ अविनाश कुमार ने दी दबिश; बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज।

मधेपुरा | 20 मार्च, 2026

​मधेपुरा के चौसा-उदाकिशुनगंज स्टेट हाईवे-58 पर एक बार फिर खूनी खेल खेला गया है। बुधवार की देर रात बेखौफ अपराधियों ने एक युवक की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश और भय का माहौल है। 28 साल के दिलखुश की मौत ने एक बार फिर हाईवे पर सुरक्षा और पुलिस गश्त की पोल खोल दी है।

बाजार जाने के दौरान ‘मौत’ ने घेरा: पेट के पार निकल गई गोली

​परिजनों और चश्मदीदों के अनुसार, दिलखुश अपने दोस्त के साथ बाइक पर पीछे बैठकर चौसा बाजार जा रहा था:

  • अचानक हमला: जैसे ही उनकी बाइक घोषई की छोटी पुलिया के पास पहुंची, पीछे से आ रहे एक बाइक पर सवार तीन बदमाशों ने उन्हें घेर लिया।
  • टारगेट फायरिंग: बदमाशों ने सीधे दिलखुश को निशाना बनाया। गोली उसके पेट में लगी और आर-पार निकल गई।
  • अस्पताल में संघर्ष: आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौसा ले जाया गया, जहाँ से उसे मधेपुरा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था; इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

VOB का नजरिया: क्या ‘हाईवे’ बन गए हैं अपराधियों के चारागाह?

​मधेपुरा में दिलखुश की हत्या महज एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था के प्रति बढ़ती चुनौती है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि स्टेट हाईवे-58 पर सरेआम एक बाइक पर तीन बदमाशों का घूमना और हत्या कर फरार हो जाना पुलिस की ‘नाइट पेट्रोलिंग’ पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

​अक्सर देखा गया है कि मधेपुरा के इन इलाकों में पुरानी रंजिश या लूटपाट के लिए अपराधी घात लगाकर बैठते हैं। मृतक दिलखुश के दोस्त (जो बाइक चला रहा था) से गहन पूछताछ और तकनीकी सर्विलांस ही इस ‘मर्डर मिस्ट्री’ का खुलासा कर पाएगी। पुलिस को केवल छापेमारी का ‘रूटीन’ बयान नहीं देना चाहिए, बल्कि हाईवे पर सीसीटीवी और गश्त की ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि भविष्य में कोई और ‘दिलखुश’ खौफ की भेंट न चढ़े।

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