
पटना। में हड़ताल पर गए अंचल अधिकारियों और राजस्व पदाधिकारियों के खिलाफ सरकार ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। काम पर लौट चुके अधिकारियों को धमकाने और प्रशासनिक कार्य में बाधा डालने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी तरह की दबंगई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि धमकी देने वाले संघ नेताओं और पदाधिकारियों के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
धमकी और दबाव की शिकायतें
सरकार के पास लगातार ऐसी शिकायतें पहुंच रही थीं कि हड़ताल पर गए अधिकारी, काम पर लौटे अपने ही साथियों को फोन और सोशल मीडिया के जरिए धमका रहे हैं।
बताया गया है कि WhatsApp कॉल और मैसेज के जरिए अधिकारियों को डराया-धमकाया जा रहा है, वहीं सोशल मीडिया पर ‘Naming & Shaming’ कर उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की कोशिश की जा रही है।
सरकार ने इसे न सिर्फ सेवा नियमों का उल्लंघन माना है, बल्कि सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य करार दिया है।
किन धाराओं में होगी कार्रवाई?
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषियों पर
- की कई धाराओं के तहत केस दर्ज होगा
- साथ ही की संबंधित धाराओं में भी कार्रवाई की जाएगी
सरकार का कहना है कि सरकारी कामकाज में बाधा डालना और अधिकारियों को डराना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
BiRSA पर शिकंजा
राज्य सरकार ने के उन नेताओं को सीधे निशाने पर लिया है, जो हड़ताल के दौरान माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। विभाग ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे लोगों की पहचान कर तुरंत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
हड़ताल कमजोर पड़ने लगी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सख्ती के बाद अब हड़ताल का असर कम होता दिख रहा है। अब तक 24 से ज्यादा अधिकारी वापस काम पर लौट चुके हैं। प्रशासन ने पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर कामकाज जारी रखने के निर्देश दिए थे।
प्रशासन को सख्त निर्देश
सभी जिलाधिकारियों को कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में स्थिति पर नजर रखें और किसी भी तरह की धमकी या अव्यवस्था की सूचना तुरंत विभाग को दें। साथ ही, की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष: बिहार सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश को अब सख्ती से कुचला जाएगा। हड़ताल के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए सरकार ने कानून का सहारा लेकर स्पष्ट संदेश दिया है—अब धमकी या दबाव की राजनीति नहीं चलेगी।


