निजी स्कूलों पर सख्ती: फीस, यूनिफॉर्म और किताबों को लेकर भोजपुर प्रशासन का बड़ा आदेश

आरा, सोमवार (06 अप्रैल 2026): बिहार के भोजपुर जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। लगातार मिल रही शिकायतों—जैसे मनमानी फीस वसूली, जबरन री-एडमिशन चार्ज, और यूनिफॉर्म व किताबें एक ही दुकान से खरीदने की बाध्यता—को देखते हुए प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।

15 अप्रैल तक पूरी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य
जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जिले के सभी निजी विद्यालयों को 15 अप्रैल 2026 तक अपनी फीस संरचना, अनिवार्य किताबों की सूची और यूनिफॉर्म का पूरा विवरण सार्वजनिक करना होगा। यह जानकारी स्कूल की वेबसाइट या किसी सार्वजनिक स्थान पर उपलब्ध करानी होगी, ताकि अभिभावक पारदर्शिता के साथ निर्णय ले सकें।

एक दुकान से खरीदारी की बाध्यता खत्म
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार कहीं से भी सामान खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे। ऐसा करने के लिए दबाव बनाना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

यूनिफॉर्म में बार-बार बदलाव पर रोक
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्कूल प्रबंधन यूनिफॉर्म में अनावश्यक बदलाव नहीं करेंगे। बार-बार यूनिफॉर्म बदलने से अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है, जिसे अब प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।

जांच के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त
जिला प्रशासन ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाते हुए निजी विद्यालयों की निगरानी का जिम्मा सौंपा है। ये अधिकारी स्कूलों में जाकर फीस, किताब, यूनिफॉर्म और अन्य व्यवस्थाओं की जांच करेंगे। साथ ही विद्यालय की मान्यता, यू-डायस कोड, छात्र संख्या और अभिभावकों की शिकायतों का भी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

निजी स्कूलों पर सख्ती: फीस, यूनिफॉर्म और किताबों को लेकर भोजपुर प्रशासन का बड़ा आदेश

नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि किसी स्कूल में अवैध शुल्क वसूली या आर्थिक शोषण पाया गया, तो उसे तुरंत वापस करना होगा। इसके अलावा स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उसकी मान्यता निलंबित या रद्द भी की जा सकती है।

कानूनी कार्रवाई भी होगी संभव
बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) विधेयक-2019 के तहत दोषी पाए जाने पर स्कूल के प्राचार्य, संचालक और प्रबंधन समिति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने साफ किया है कि शिक्षा को व्यवसाय बनाने की प्रवृत्ति को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अभिभावकों को मिलेगी राहत
इस फैसले को अभिभावकों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से स्कूलों की मनमानी से परेशान अभिभावकों को अब पारदर्शिता और विकल्प का अधिकार मिलेगा।

प्रशासन की सख्त निगरानी जारी
जिला और अनुमंडल स्तर पर इस आदेश के अनुपालन की लगातार निगरानी की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जांच रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करें और किसी भी अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें।

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