द वॉयस ऑफ बिहार | भागलपुर (19 फरवरी 2026)
भागलपुर के नाथनगर थाना में पदस्थापित रहे दो दरोगा, रोहित रितेश और राजीव रंजन के लिए बुधवार का दिन अदालती कार्यवाही के बीच भारी तनाव भरा रहा। अदालती आदेश की अवहेलना और सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहने के कारण गैर-जमानती वारंट (NBW) का सामना कर रहे दोनों पुलिस अधिकारियों को कोर्ट के सख्त तेवर झेलने पड़े।
ढाई घंटे तक कोर्ट कस्टडी में रहे अधिकारी
प्रथम श्रेणी की न्यायिक दंडाधिकारी सलोनी कुमारी की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया।
- कस्टडी: जैसे ही दोनों दरोगा कोर्ट में आत्मसमर्पण करने पहुंचे, अदालत ने उन्हें लगभग ढाई घंटे तक कस्टडी में रखने का आदेश दिया।
- हिदायत के साथ बेल: काफी देर तक कस्टडी में रखने के बाद, अदालत ने इस शर्त और हिदायत के साथ उनकी बेल अर्जी स्वीकार की कि भविष्य में वे कोर्ट के हर आदेश का पालन करेंगे और प्रत्येक सुनवाई की तारीख पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद नाथनगर थाना क्षेत्र के नरगा की रहने वाली एक युवती नेहा द्वारा दर्ज कराए गए कंप्लेंट केस से जुड़ा है।
- आरोप: परिवादिनी नेहा ने अदालत को बताया था कि एक पारिवारिक झगड़े के दौरान शिकायत मिलते ही दोनों दरोगा अपने अन्य साथियों के साथ जबरन उसके घर में घुस गए थे।
- बदसलूकी: आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने न केवल घर में प्रवेश किया, बल्कि युवती और उसकी मां के साथ अभद्र व्यवहार और बदसलूकी भी की। इसी मामले में दोनों दरोगा आरोपी बनाए गए थे।
अदालत की कार्रवाई और वारंट
सुनवाई के दौरान कोर्ट में हाजिर नहीं होने के कारण पूर्व में इनका बेल बॉन्ड रद्द कर दिया गया था और इनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। बुधवार को मामले की बहस में परिवादिनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आलय बनर्जी ने पक्ष रखा और पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
यह घटना उन पुलिस अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो अदालती आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। कानून के रक्षकों को ही कानून के कटघरे में कस्टडी में रहना पड़ा, जो इलाके में चर्चा का विषय बना रहा।
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