तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी और संतोष सहनी को कोर्ट का नोटिस, चुनाव चिन्ह के दुरुपयोग का लगा आरोप

बिहार की सियासत में हलचल उस वक्त और तेज हो गई जब मुजफ्फरपुर की एडीजे-प्रथम अदालत ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, वीआईपी प्रमुख और पूर्व मंत्री मुकेश सहनी, तथा उनके भाई संतोष सहनी को नोटिस जारी किया। अदालत ने आदेश दिया है कि ये तीनों नेता आगामी 6 मई को सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से या अपने वकील के माध्यम से पेश हों।

यह मामला चुनाव आयोग द्वारा भारतीय सार्थक पार्टी को आवंटित किए गए चुनाव चिह्न ‘नाव’ के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने इस संबंध में अदालत का रुख किया था। ओझा का आरोप है कि लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान ‘नाव’ चुनाव चिह्न का उपयोग महागठबंधन के प्रचार में अनुचित रूप से किया गया।

ओझा ने 18 अप्रैल 2024 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में परिवाद दायर किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और उनके भाई ने चुनाव चिह्न को वापस लेने का दबाव बनाया, और इनकार के बावजूद उसका प्रयोग महागठबंधन के प्रचार में किया गया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि तेजस्वी यादव ने इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई।

हालांकि, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने इस परिवाद को पहले ही खारिज कर दिया था। लेकिन उसके बाद सुधीर ओझा ने यह मामला क्रिमिनल रिवीजन के रूप में पुनः प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में प्रस्तुत किया, जिसे सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया। अब एडीजे प्रथम की अदालत ने तीनों नेताओं को नोटिस जारी कर दिया है।

जैसे ही यह खबर सामने आई, बिहार के राजनीतिक हलकों में इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। इस नोटिस को आगामी लोकसभा चुनावों से पहले महागठबंधन के लिए एक नए संकट के रूप में देखा जा रहा है।

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