पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच पटना की विशेष निगरानी अदालत ने एक अहम फैसले में रिश्वत लेने के दोषी पाए गए अंचल कार्यालय के पूर्व प्रधान लिपिक को तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में उसे अतिरिक्त एक माह की कारावास की सजा भी भुगतनी होगी।
मामले की सुनवाई पटना स्थित निगरानी के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने रोहतास जिले के दिनारा अंचल कार्यालय के तत्कालीन प्रधान लिपिक रामनरेश प्रसाद को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला वर्ष 2008 का है। उस समय रामनरेश प्रसाद दिनारा अंचल कार्यालय में प्रधान लिपिक के पद पर कार्यरत थे। आरोप था कि उन्होंने एक स्थानीय व्यक्ति से उसकी जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया पूरी कराने के बदले 8 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग की टीम ने मामले की जांच शुरू की। 25 दिसंबर 2008 को निगरानी अधिकारियों ने जाल बिछाकर आरोपी को शिकायतकर्ता से 8 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों को अदालत में पेश किया गया। सभी गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए सख्त सजा सुनाई।
अदालत के इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वत लेना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।


