नवगछिया/भागलपुर | 01 मार्च, 2026: बिहार के राजस्व महकमे में ‘बिचौलियों’ और ‘नजराने’ का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला नवगछिया के गोपालपुर अंचल से सामने आया है, जहाँ अंचलाधिकारी (CO) के ड्राइवर और जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) कराने वाले एक व्यक्ति के बीच बातचीत का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस ऑडियो ने अंचल कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी है।
वायरल ऑडियो: “रुपये भी लिए और काम भी नहीं हुआ”
वायरल हो रहे इस कथित ऑडियो में पीड़ित व्यक्ति और ड्राइवर के बीच तीखी बहस और सौदेबाजी सुनी जा सकती है। ऑडियो के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:
- प्रतिष्ठा का सवाल: पीड़ित व्यक्ति ड्राइवर से कह रहा है कि म्यूटेशन कराने के एवज में मांगी गई ‘नजराना’ (रिश्वत) की राशि उपलब्ध कराने के बावजूद उसका काम नहीं हुआ, जिससे समाज में उसकी प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है।
- रकम वापसी का डर: पीड़ित सवाल कर रहा है कि यदि दी गई राशि वापस हो जाती है, तो अब उसका काम कैसे होगा? वह यह भी पूछ रहा है कि क्या इस बारे में ‘साहब’ (CO) से कोई बात हुई थी?
- मकंदपुर चौक पर मीटिंग: जवाब में ड्राइवर उसे मकंदपुर चौक पर मिलने के लिए बुला रहा है और आश्वासन दे रहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है, काम हो जाएगा।
नोट: ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस वायरल ऑडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है।
CO का रुख: “जांच कर होगी कार्रवाई”
मामले ने तूल पकड़ा तो गोपालपुर के अंचलाधिकारी रौशन कुमार ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी गंभीरता से जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि ड्राइवर या कोई भी कर्मी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
VOB का नजरिया: अंचल कार्यालयों में कब रुकेगी ‘टेबल के नीचे’ वाली डील?
बिहार में जमीन से जुड़े विवादों की एक बड़ी वजह अंचल कार्यालयों में होने वाली देरी और भ्रष्टाचार है। दाखिल-खारिज जैसी सामान्य प्रक्रिया के लिए भी आम आदमी को ड्राइवर और मुंशियों के जरिए ‘नजराना’ पहुँचाना पड़ता है। गोपालपुर का यह वायरल ऑडियो महज एक बानगी है कि कैसे सिस्टम के निचले स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें जमी हुई हैं। जब तक ‘साहब’ के नाम पर वसूली करने वाले इन बिचौलियों पर लगाम नहीं लगेगी, तब तक आम जनता को न्याय मिलना मुश्किल है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


