शराबबंदी पर विरोधाभास: उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक पाठशाला के दो छात्रों में टकराव

पटना: बिहार विधानसभा में शराबबंदी कानून की समीक्षा को लेकर 17 फरवरी 2026 को एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया। इस बार बहस का केंद्र बने उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक पाठशाला से निकले दो नेताओं के बीच टकराव।

दोनों नेता—माधव आनंद और अभिषेक झा—एक ही राजनीतिक गुरु की छत्रछाया में राजनीति सीख चुके हैं। लेकिन आज उनके दृष्टिकोण में जमीन-आसमान का अंतर दिखा।


अभिषेक और माधव: उपेंद्र कुशवाहा के छात्र

  • माधव आनंद: लंबे समय से विधानसभा में अपनी जगह बनाने को तत्पर, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए के प्रत्याशी के रूप में जीतकर सदन पहुंचे। वे आज राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक दल के नेता हैं।
  • अभिषेक झा: कुशवाहा की पाठशाला से निकलकर जेडीयू में शामिल हुए और अब पार्टी प्रवक्ता हैं। झा को पहले बिहार विधान परिषद की तिरहुत सीट से प्रत्याशी बनाया गया था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

शराबबंदी कानून की समीक्षा पर विवाद

बिहार विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान माधव आनंद ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसलों की समीक्षा होती रहती है, इसलिए शराबबंदी पर भी इसका आकलन होना चाहिए। माधव ने जोर देकर कहा कि समाज पर शराबबंदी के प्रभाव, जागरूकता और फायदे-नुकसान की समीक्षा होनी चाहिए।

इस मांग के बाद जेडीयू ने प्रतिक्रिया देते हुए अभिषेक झा को मुद्दे पर सामने उतारा।


अभिषेक झा का जवाब

अभिषेक झा ने माधव आनंद का नाम लिए बिना बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि:

  • शराबबंदी की समीक्षा का नाम लेकर बिहार में शराब को चालू करना किसी हाल में नहीं होगा।
  • नीतीश कुमार की शराबबंदी लागू रहेगी।
  • जो लोग दिल्ली आते-जाते रहते हैं, वे बिहार में शराब चालू नहीं करा सकते।

झा के बयान का मकसद स्पष्ट था: पार्टी ने अपने ही गठबंधन के विधायक को इशारों में कहा कि अगर शराब का शौक है तो दिल्ली में पूरा करें, बिहार में नहीं।


माधव आनंद की प्रतिक्रिया

माधव आनंद ने झा की प्रतिक्रिया को नकारते हुए कहा कि वे अभिषेक झा को पहचानते ही नहीं। उन्होंने कहा:

“कौन है अभिषेक झा..? हम नहीं जानते हैं। सदन का हिस्सा हैं..? हमें नहीं पता कौन क्या कहता है। दिल्ली हम क्यों जाते हैं.. मेरा घर है, व्यापार है। इसलिए दिल्ली जाते हैं।”


निष्कर्ष

उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक पाठशाला से निकले दोनों नेताओं का यह विवाद साबित करता है कि एक ही राजनीतिक गुरुकुल से निकलने के बावजूद, दृष्टिकोण और रणनीति में भारी भिन्नता हो सकती है। शराबबंदी को लेकर दोनों की बयानबाजी ने बिहार की सियासी परिदृश्य में नई हलचल पैदा कर दी है।


 

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