बिहार में ‘सुपारी किलर निगरानी सेल’ का गठन, संगठित अपराधियों पर एसटीएफ की सख्त नजर

पटना | 16 जुलाई 2025:राज्य में संगठित अपराध, सुपारी किलिंग और गैंगस्टर नेटवर्क पर लगाम कसने के लिए बिहार पुलिस अब हाई अलर्ट मोड में है। एडीजी (मुख्यालय) एवं एसटीएफ प्रमुख कुंदन कृष्णन ने जानकारी दी कि अब राज्यभर के सुपारी किलर्स की पहचान कर उनका डिजिटल डोजियर तैयार किया जा रहा है।

इसके लिए ‘सुपारी किलर निगरानी सेल’ का गठन किया गया है, जो इन अपराधियों की तस्वीर, नाम, पता और आपराधिक इतिहास सहित सभी आवश्यक जानकारियां एकत्र करेगा। इस पहल से अपराध की साजिशों को पहले ही नाकाम किया जा सकेगा।


संगठित गैंग्स और नशा कारोबार पर विशेष कार्रवाई

एडीजी ने बताया कि राज्य के कुख्यात कोढ़ा गैंग और बेगूसराय के तिवारी गैंग पर निगरानी रखने के लिए विशेष सेल गठित किए गए हैं। साथ ही नशे के अवैध धंधे पर रोकथाम के लिए एसटीएफ में नॉरकोटिक्स सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है, जिसकी क्षमताओं को बढ़ाया जा रहा है और स्थानीय थानों से बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जा रहा है।


फास्ट ट्रैक कोर्ट की वापसी की तैयारी

बिहार पुलिस संगीन अपराधों में त्वरित न्याय दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए गृह विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। एडीजी ने चिंता जताई कि 2012-13 में जहां सालाना 2-3 हजार अपराधियों को सजा मिलती थी, अब यह संख्या घटकर 500-600 के बीच रह गई है।


1290 अपराधियों की संपत्ति जब्त की जाएगी

राज्यभर में ऐसे 1290 अपराधियों की पहचान की गई है, जिन्होंने अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की है। अब इनकी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि किसी नाबालिग के पास पिता का लाइसेंसी हथियार पाया गया तो अभिभावक को जेल भेजा जाएगा


अपराध में गिरावट का दावा

एडीजी कुंदन कृष्णन ने दावा किया कि राज्य में अपराध घटते हुए आंकड़ों के साथ नियंत्रण में है। मई-जून 2024 की तुलना में 2025 में अपराधिक घटनाओं में कमी आई है। कई हाई प्रोफाइल मामलों—जैसे दानापुर ज्वेलरी लूट, आरा तनिष्क कांड, और समस्तीपुर बैंक डकैती के आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।


नक्सलवाद पर बड़ी कामयाबी

बिहार पुलिस को नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़ी सफलता मिली है। इस वर्ष अब तक 82 नक्सलियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गया, औरंगाबाद, मुंगेर और जमुई जैसे इलाकों से हथियारबंद दस्तों का सफाया हो चुका है। सिर्फ जमुई और खड़गपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में ही कुछ प्रभाव बाकी है, जिसे जल्द खत्म करने की तैयारी है।


 

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