बिहार में ‘संविधान हत्या दिवस’ का आयोजन, उपमुख्यमंत्रियों ने कहा—आपातकाल लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय

पटना, 26 जून — भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 एक ऐसी तारीख है, जिसे न तो भुलाया जा सकता है और न ही माफ किया जा सकता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मंगलवार को बिहार समेत देशभर में ‘संविधान हत्या दिवस 2025’ के रूप में कार्यक्रम आयोजित किए गए।

राजधानी पटना के अधिवेशन भवन सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

दीप प्रज्वलन और डॉक्यूमेंट्री से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन से की गई। इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्मित एक विशेष टेलीफिल्म का प्रदर्शन हुआ, जिसमें आपातकाल के दौर में लोकतंत्र, प्रेस और नागरिक अधिकारों पर लगे प्रतिबंधों को दर्शाया गया।

“तानाशाही मानसिकता ने संविधान को रौंदा”—विजय सिन्हा

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आपातकाल को लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए कहा,

“25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला दिन था। एक परिवार की सत्ता बचाने के लिए पूरे देश को बंधक बना लिया गया।”

उन्होंने जेपी आंदोलन की चर्चा करते हुए कहा कि लाखों छात्रों और युवाओं को बिना मुकदमे जेलों में डाल दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप थोप दी गई और संवैधानिक अधिकारों को कुचल दिया गया।

“भारत को दहाड़ता हुआ शेर बना रहे मोदी”—सम्राट चौधरी

दूसरे उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि

“26 नवंबर 1949 को बना संविधान 25 जून 1975 को रौंदा गया। एक पार्टी की सत्ता की भूख ने लोकतंत्र को अपवित्र करने की कोशिश की।”

उन्होंने आगे कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत फिर से विश्व मंच पर अपनी पहचान बना रहा है और ‘मेकिंग इंडिया’ के सपने को साकार किया जा रहा है।

युवाओं को लोकतंत्र की रक्षा के लिए जागरूक होने का आह्वान

दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने युवाओं से लोकतांत्रिक चेतना को जीवित रखने और इतिहास से सीख लेने का आग्रह किया। सम्राट चौधरी ने कहा कि

“अगर आज का युवा सजग न हुआ, तो लोकतंत्र फिर खतरे में पड़ सकता है।”

उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौरान जब नीतीश कुमार जेल में थे, तब उन्होंने महिलाओं को 50% आरक्षण देने का संकल्प लिया था, जो आज साकार हो चुका है।

बिहार की भूमिका को बताया ऐतिहासिक

विजय कुमार सिन्हा ने बिहार को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा,

“बिहार की धरती ने भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाया और संपूर्ण क्रांति को दिशा दी। यही धरती जेपी आंदोलन की जन्मस्थली रही है।”

कार्यक्रम में छात्रों की भागीदारी और भावनात्मक माहौल

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, बुद्धिजीवी, अधिकारी और आमजन उपस्थित थे। आयोजन के अंत में सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक श्रीमती रूबी ने दोनों उपमुख्यमंत्रियों का स्वागत करते हुए आभार प्रकट किया।


 

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