पटना। बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन के भीतर समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। कांग्रेस ने इस बार साफ कर दिया है कि वह पूरे चुनाव प्रचार अभियान की कमान खुद संभालेगी और अपने मुद्दों को महागठबंधन के साझा घोषणापत्र में शामिल करवाएगी। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी अब ‘छोटे भाई’ की भूमिका में नहीं रहना चाहती।
कांग्रेस की वोटर अधिकार यात्रा और टिकट बंटवारे पर उसके रुख ने यह संदेश दिया है कि पार्टी अब तेजस्वी यादव पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। कांग्रेस महासचिव नासिर हुसैन ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट कहा कि सत्ता में आने पर पार्टी अपने वादों को पूरा करेगी। उन्होंने अति पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में बढ़ोतरी की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि कर्नाटक और तेलंगाना की तरह इसे बिहार में भी लागू कराया जाएगा।
तेजस्वी पर भरोसा कम?

नासिर हुसैन के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यह संदेश राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और तेजस्वी यादव दोनों के लिए है कि कांग्रेस अब महागठबंधन में छोटी भूमिका नहीं निभाएगी।
महागठबंधन के सीएम चेहरे को लेकर कांग्रेस अब तक स्पष्ट रुख नहीं ले पाई है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु दोनों ही सवाल टालते रहे हैं। अल्लावरु ने हाल में कहा था कि कांग्रेस का मुख्य मुद्दा मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं बल्कि वोटों की चोरी रोकना है।
RJD और VIP का स्टैंड
दूसरी ओर, आरजेडी और वीआईपी तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सीएम फेस मानकर रणनीति बना रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने सीटों की सूची आरजेडी को सौंप दी है और संकेत दिया है कि यदि सीटों के बंटवारे में देरी हुई तो पार्टी अपने दम पर 30 सीटों पर प्रचार शुरू कर देगी।
चुनावी उलझन बढ़ी
संभावना है कि अगले महीने बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा हो जाएगी। ऐसे में महागठबंधन के भीतर सीएम चेहरे और सीट बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। अब सियासी हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि महागठबंधन में ‘बड़े भाई’ की भूमिका आखिर किसके हाथ में होगी?


