कुर्मी वोटबैंक में सेंध लगाएगी कांग्रेस! भूपेश बघेल की एंट्री से बढ़ी बिहार की सियासी गर्मी

19 मई को पटना आएंगे पूर्व सीएम भूपेश बघेल, कुर्मी समाज और युवाओं से करेंगे संवाद | नीतीश कुमार की चिंता बढ़ी

पटना | राजनीति रिपोर्ट | 6 मई 2025

बिहार की राजनीति में कुर्मी वोटबैंक को लेकर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने अब इस 4% प्रभावशाली वोट समूह को साधने की रणनीति बना ली है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 19 मई को पटना आ रहे हैं। उनका दौरा महज शिष्टाचार यात्रा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सियासी चाल है—जिसका मकसद है नीतीश कुमार के मजबूत आधार को चुनौती देना।

कुर्मी समाज से सीधा संवाद, राहुल गांधी का संदेश लेकर आएंगे बघेल

भूपेश बघेल पटना में कुर्मी समाज के प्रमुख लोगों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे राहुल गांधी के विचार और सामाजिक न्याय की कांग्रेस नीति को समाज के सामने रखेंगे। बिहार में कुर्मी समाज ओबीसी के भीतर एक संगठित और जागरूक समुदाय माना जाता है, जो कई विधानसभा सीटों पर चुनावी नतीजे पलटने की क्षमता रखता है। अब तक यह वोटबैंक मुख्यतः नीतीश कुमार और जदयू के साथ माना जाता रहा है।

युवाओं से सीधा संवाद: पटेल छात्रावास में विशेष कार्यक्रम

बघेल सिर्फ बुजुर्गों या नेताओं से नहीं, बल्कि युवाओं से भी जुड़ने की कोशिश करेंगे। वे पटना के पटेल छात्रावास में छात्रों से संवाद करेंगे, उनकी समस्याएं जानेंगे और कांग्रेस के विजन को साझा करेंगे। यह कदम कांग्रेस की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें युवाओं और जातीय समूहों के बीच सीधा जुड़ाव सबसे अहम है।

सदाकत आश्रम में कांग्रेस नेताओं के साथ मंथन

कुर्मी समाज की बैठक के बाद भूपेश बघेल सदाकत आश्रम में बिहार कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में वे राहुल गांधी की रणनीति और जातीय जनगणना जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। बघेल कांग्रेस नेताओं को बताएंगे कि कैसे स्थानीय जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए 2025 के विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाई जा सकती है।

क्या कमजोर होगा नीतीश कुमार का गढ़?

नीतीश कुमार की पार्टी जदयू का गढ़ माने जाने वाला कुर्मी वोटबैंक कांग्रेस के रडार पर आ चुका है। अगर कांग्रेस इस समाज में थोड़ी भी पकड़ बनाने में सफल होती है, तो यह जदयू और महागठबंधन के अंदरुनी समीकरण को भी प्रभावित कर सकता है।

इस समय कांग्रेस और राजद के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है, ऐसे में कांग्रेस का यह ‘सक्रिय जातीय आउटरीच’ उसके दांव को और मजबूत कर सकता है।

कांग्रेस का बदला अंदाज़, नीतीश पर सीधा निशाना

भूपेश बघेल की यह यात्रा यह साफ संकेत है कि कांग्रेस अब बिहार की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाने की तैयारी में है। नीतीश कुमार के परंपरागत वोटबैंकों में सेंध लगाकर कांग्रेस अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाना चाहती है। देखना होगा कि नीतीश बाबू इस सियासी चुनौती का जवाब कैसे देते हैं।

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