कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। यह नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा गया, जिस पर पार्टी के 118 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। कांग्रेस ने यह प्रस्ताव नियम 94C के तहत पेश किया है।
प्रस्ताव लाने की वजह
कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। साथ ही पार्टी ने आरोप लगाया है कि सदन में उसकी महिला सांसदों के खिलाफ अनुचित स्थिति उत्पन्न हुई।
विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों को खुलकर बोलने की छूट दी जा रही है।
संसदीय इतिहास में पहले के उदाहरण
भारतीय संसदीय इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के कुछ ही उदाहरण मिलते हैं—
- 1954: सोशलिस्ट सांसद विग्नेश्वर मिसिर ने स्पीकर जी.वी. मावलंकर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए प्रस्ताव लाया, जिसे बहस के बाद खारिज कर दिया गया।
- 1966: मधु लिमये ने स्पीकर हुकम सिंह के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, लेकिन पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने से स्वीकार नहीं हुआ।
- 1987: सोमनाथ चटर्जी ने स्पीकर बलराम जाखड़ के खिलाफ प्रस्ताव लाया, जिसे सदन ने खारिज कर दिया।
संवैधानिक प्रावधान
संविधान के अनुच्छेद 94 के अनुसार लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए कम से कम 14 दिन का नोटिस देना जरूरी होता है और प्रस्ताव को सदन में बहुमत से पारित होना आवश्यक है।


