बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने सोमवार को पटना के सदाकत आश्रम में पहली समीक्षा बैठक की। इस बैठक में जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों ने खुलकर पार्टी के निर्णयों पर सवाल उठाए। सीट शेयरिंग, टिकट बंटवारे, आरजेडी से गठबंधन और पर्यवेक्षकों की भूमिका पर नेताओं ने असंतोष जताया।
जमीनी नेताओं की अनदेखी पर नाराज़गी
बैठक में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि टिकट बंटवारे में जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया और दूसरे दलों से आए नेताओं को तरजीह दी गई।
रोहतास जिलाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार पांडेय ने कहा:
“वोट चोरी की बातें बहाना हैं। असल समस्या है कि जमीनी नेताओं को टिकट नहीं दिया गया। दिल्ली से आए बड़े नेता होटल में ही रुके रहे और कॉरपोरेशन नहीं किया।”
उन्होंने राहुल गांधी के मेहनत करने की तारीफ करते हुए प्रदेश नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए।
नालंदा कांग्रेस: ‘सच्चे कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिला’
नालंदा जिलाध्यक्ष अनिल प्रसाद ने भी कहा कि पार्टी पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं से संवाद नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार गिरता जा रहा है।
आरजेडी से गठबंधन पर भी सवाल
कई जिलाध्यक्षों ने साफ कहा कि पार्टी को राजद से गठबंधन पर पुनर्विचार करना चाहिए। नालंदा जिलाध्यक्ष ने कहा कि:
“कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ती तो बेहतर परिणाम मिलता। अब राष्ट्रीय नेतृत्व को सोचना होगा।”
सिवान जिलाध्यक्ष सुशील कुमार ने आरोप लगाया कि आरजेडी ने कई सीटों पर कांग्रेस की अनदेखी की और मनमानी की।
महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा
महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरवत जहां फ़ातिमा ने खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा:
“आज कांग्रेस के केवल 6 विधायक शपथ ले रहे हैं। पार्टी क्यों सिमट रही है, इसे लेकर नेतृत्व को गंभीर होना चाहिए।”
उन्होंने पुराने उदाहरण देते हुए कहा कि खराब प्रदर्शन होने पर अतीत में भी कई नेताओं ने नैतिक जिम्मेदारी ली है।
बैठक में उठे मुद्दे
प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने बताया कि बैठक में चार प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई—
- वोट चोरी का मुद्दा और 14 दिसंबर को दिल्ली की रैली
- हार की समीक्षा
- कार्यकर्ताओं व नेताओं के बीच तालमेल
- पंचायत से जिला स्तर तक संगठन को मजबूत करने की रणनीति
कई जिलाध्यक्ष रहे बैठक में शामिल
समीक्षा बैठक में प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावारु, वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान, जिलाध्यक्ष और विभिन्न क्षेत्रों के पदाधिकारी शामिल हुए।


