भागलपुर-बांका में जमीन सर्वे पर कमिश्नर सख्त! अमीन-कानूनगो की लगेगी क्लास, हर महीने कैंपों की होगी जांच; रैयतों की आपत्तियों पर प्रशासन की पैनी नजर

HIGHLIGHTS: प्रमंडलीय आयुक्त अवनीश कुमार सिंह ने कसी कमर; विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त कार्यों में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति, समय सीमा के भीतर काम पूरा करने का अल्टीमेटम

  • बड़ी समीक्षा: भागलपुर और बांका जिले में चल रहे विशेष सर्वेक्षण कार्यों को लेकर प्रमंडलीय आयुक्त की हाई-लेवल बैठक संपन्न।
  • सख्त निर्देश: बंदोबस्त पदाधिकारियों को हर माह सभी शिविरों का अनिवार्य निरीक्षण करने का आदेश।
  • साप्ताहिक टारगेट: अमीन और कानूनगो के लिए अब ‘टारगेट’ वाला सप्ताह होगा; हर काम के लिए समय सीमा (Deadline) निर्धारित।
  • अनुशासन पर जोर: सर्वेक्षण कर्मियों की डायरी और उपस्थिति की होगी सरप्राइज चेकिंग; काम में ढिलाई पर होगी कार्रवाई।
  • रैयतों को राहत: जमीन मालिकों (रैयतों) से प्राप्त आपत्तियों का तत्काल और पारदर्शी समाधान करने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग का निर्देश।
  • VOB इनसाइट: जमीन के पुराने विवादों को सुलझाने और नया खतियान तैयार करने के इस महा-अभियान में ‘तटस्थता’ ही सबसे बड़ी चुनौती।

भागलपुर | 25 मार्च, 2026

​भागलपुर और बांका जिले के हजारों जमीन मालिकों के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी ‘विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त’ अभियान को गति देने और इसमें पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रमंडलीय आयुक्त श्री अवनीश कुमार सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को हुई समीक्षा बैठक में आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया कि अमीन और कानूनगो अब अपनी मर्जी से काम नहीं कर पाएंगे; उनके हर हफ्ते के काम का हिसाब अब फाइलों में दर्ज होगा।

शिविरों का होगा ‘सर्जिकल’ निरीक्षण: बंदोबस्त पदाधिकारियों की बढ़ी जिम्मेदारी

​प्रमंडलीय आयुक्त ने बैठक में मौजूद भागलपुर और बांका के बंदोबस्त पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे केवल दफ्तर में बैठकर रिपोर्ट न देखें। अब उन्हें हर महीने अपने जिले के सभी सर्वेक्षण शिविरों का भौतिक निरीक्षण और पर्यवेक्षण करना होगा। इस कदम का उद्देश्य जमीनी स्तर पर हो रही गड़बड़ियों को रोकना और काम की रफ्तार को बढ़ाना है।

​आयुक्त ने विशेष रूप से अमीन और कानूनगो की कार्यप्रणाली पर नजर रखने को कहा है। अब इन कर्मियों को अपनी दैनिक डायरी और उपस्थिति को नियमित रूप से अपडेट रखना होगा, जिसकी जांच कभी भी आला अधिकारियों द्वारा की जा सकती है।

VOB डेटा चार्ट: विशेष सर्वेक्षण 2026 — प्रशासनिक निर्देश और कार्ययोजना

 

रैयतों की आपत्तियों पर ‘सुपर विजन’: विवादों के निपटारे के लिए नई रणनीति

​जमीन सर्वे के दौरान सबसे बड़ी चुनौती रैयतों (जमीन मालिकों) के बीच होने वाले आपसी विवाद और आपत्तियां हैं। कमिश्नर अवनीश कुमार सिंह ने निर्देश दिया है कि रैयतों से प्राप्त होने वाली हर आपत्ति का एक रजिस्टर बनाया जाए और उसका निरंतर अनुश्रवण (Follow-up) किया जाए।

​उन्होंने सहायक बंदोबस्त पदाधिकारियों को विशेष हिदायत दी है कि सर्वेक्षण कार्य के दौरान शिविरों में पूरी तरह ‘तटस्थ’ (Neutral) रहकर कार्य करें। किसी भी पक्ष की ओर झुकाव या भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर संबंधित कर्मी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजस्व प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने का भी निर्देश दिया गया है ताकि कागजी कार्यवाही में कोई तकनीकी अड़चन न आए।

VOB का नजरिया: क्या समय पर पूरा होगा ‘भूमि सर्वेक्षण’ का सपना?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि भागलपुर प्रमंडल में जमीन सर्वे की यह समीक्षा सही समय पर की गई है।

  1. पारदर्शिता की जरूरत: बिहार में जमीन से जुड़े विवाद ही अपराध की मुख्य जड़ हैं। अगर अमीन और कानूनगो साप्ताहिक आधार पर काम करेंगे और अधिकारी शिविरों में जाएंगे, तो बिचौलियों का प्रभाव कम होगा।
  2. तकनीक बनाम श्रम: डिजिटल मैप और मैन्युअल सर्वे के बीच तालमेल बिठाना बड़ी चुनौती है। रैयतों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए सरल और पारदर्शी तंत्र की आवश्यकता है।
  3. आम जनता का सहयोग: रैयतों को भी जागरूक होना होगा और अपने दस्तावेज समय पर शिविरों में जमा करने होंगे।

सुशासन और भूमि सुधार की ओर बढ़ता कदम

​प्रमंडलीय आयुक्त की इस सख्ती के बाद अब उम्मीद है कि भागलपुर और बांका में सर्वे का काम पटरी पर लौटेगा। मार्च 2027 तक इस प्रक्रिया को पूरा करने का जो व्यापक लक्ष्य रखा गया है, उसे हासिल करने के लिए यह ‘वीकली मॉनिटरिंग’ मॉडल गेम-चेंजर साबित हो सकता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ आपके जिले के सर्वे शिविरों की हर हलचल और रैयतों के हक की हर खबर आप तक पहुँचाता रहेगा।

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