बिहार में अफसरों को CM सम्राट की दो टूक चेतावनी: 30 दिन में शिकायत नहीं सुलझी तो होगी कार्रवाई, मरीज रेफर करने पर भी सख्ती

छपरा। बिहार में जनता की शिकायतों के त्वरित समाधान और सरकारी व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को ‘सहयोग शिविर’ अभियान की शुरुआत करते हुए अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी कि यदि जनता की शिकायतों का समाधान 30 दिनों के भीतर नहीं हुआ तो संबंधित अफसरों के खिलाफ सस्पेंशन जैसी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया और कहा कि अस्पतालों से मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर करने पर सिविल सर्जन तक के खिलाफ कार्रवाई होगी।

मुख्यमंत्री ने सारण जिले के सोनपुर प्रखंड स्थित डुमरी बुजुर्ग पंचायत में पहले सहयोग शिविर का उद्घाटन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। शिविर में कुल 67 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें जमीन विवाद, राशन, पेंशन, स्वास्थ्य, सड़क और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याएं शामिल थीं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश देते हुए कहा कि हर शिकायत का समाधान तय समयसीमा के भीतर होना चाहिए।

सम्राट चौधरी ने साफ कहा कि सरकार जनता के भरोसे पर चलती है और लोगों की समस्याओं का समाधान करना उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अब लापरवाही और टालमटोल की राजनीति नहीं चलेगी। यदि किसी शिकायत का निपटारा 30 दिनों के भीतर नहीं हुआ तो 31वें दिन संबंधित अधिकारी को निलंबित करने की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री का यह बयान प्रशासनिक महकमे में चर्चा का विषय बन गया है। अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि अब फाइलों को दबाकर रखने या शिकायतों को लंबित रखने की संस्कृति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार चाहती है कि जनता को पंचायत स्तर पर ही राहत मिले और उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सभी मंत्री अपने-अपने जिलों में सहयोग शिविर लगाएंगे। इन शिविरों में अधिकारी भी मौजूद रहेंगे और मौके पर ही शिकायतों का समाधान करने की कोशिश की जाएगी। सरकार का उद्देश्य प्रशासन को गांव और पंचायत स्तर तक पहुंचाना है ताकि आम लोगों को तत्काल मदद मिल सके।

सम्राट चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक गांवों में जाकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं भ्रष्टाचार, लापरवाही या अधिकारियों की मनमानी सामने आती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

सहयोग शिविर के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी कई शिकायतें सामने आईं। लोगों ने बताया कि जिला और अनुमंडल अस्पतालों से मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों में भी बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है, जिससे गरीब मरीजों को भारी परेशानी होती है। इस पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 15 अगस्त तक ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए, जिससे मरीजों को बिना वजह रेफर करने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी अस्पताल से अनावश्यक रूप से मरीजों को रेफर किया गया तो संबंधित सिविल सर्जन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रेफर करने की व्यवस्था जारी रहेगी।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जिला और अनुमंडल अस्पतालों में आवश्यक संसाधन, डॉक्टर और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही इलाज मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर भागने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए।

सोनपुर क्षेत्र के विकास को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कई बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने इस इलाके को विकसित करने का जो वादा किया था, उसे अब जमीन पर उतारा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सोनपुर में एयरपोर्ट और नई टाउनशिप परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है।

सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि बाबा हरिहरनाथ के नाम पर नई टाउनशिप विकसित की जाएगी। उनका कहना है कि इससे न केवल क्षेत्र का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य बिहार के छोटे शहरों और कस्बों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है।

मुख्यमंत्री ने छपरा के लिए भी एक बड़ी योजना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पटना के गंगा पथ यानी मरीन ड्राइव की तर्ज पर अब छपरा में ‘गंगा-अंबिका पथ’ का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों के मुताबिक यह परियोजना क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सहयोग शिविर अभियान सरकार की प्रशासनिक छवि को मजबूत करने की कोशिश है। पंचायत स्तर पर जाकर शिकायतें सुनने और तय समयसीमा में समाधान का दावा करने से सरकार जनता के बीच जवाबदेही का संदेश देना चाहती है।

ग्रामीणों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। कई लोगों का कहना है कि पहली बार ऐसा महसूस हो रहा है कि सरकार सीधे गांवों तक पहुंच रही है। हालांकि लोगों का यह भी कहना है कि असली परीक्षा शिकायतों के समाधान और जमीनी स्तर पर कार्रवाई में होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सहयोग शिविर नियमित रूप से प्रभावी तरीके से चलाए गए तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आ सकता है। लेकिन इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही और मॉनिटरिंग बेहद जरूरी होगी।

फिलहाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार द्वारा तय की गई 30 दिनों की समयसीमा और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के निर्देश जमीन पर कितने प्रभावी साबित होते हैं।

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