
नालंदा, 01 मई 2026। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नालंदा जिले के सरमेरा प्रखंड स्थित प्रणावां गांव में आयोजित श्री श्री 108 श्री शरण निवास बाबा महतो साहब राजकीय मेला-2026 का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री का स्वागत पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर किया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि प्रणावां स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नामकरण श्री श्री 108 श्री शरण निवास बाबा महतो साहब के नाम पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाबा महतो साहब ने समाज में भाईचारा, सद्भाव और आध्यात्मिकता का संदेश दिया, जिसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। उनके योगदान को सम्मान देने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनके लिए भावुक क्षण है और बिहार के विकास में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका को भी याद किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं में व्यापक सुधार हुआ है और अब उस विकास को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी वर्तमान सरकार की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के विजन को आगे बढ़ाने की बात कही।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘सहयोग शिविर’ योजना की भी घोषणा की, जिसके तहत 19 मई से प्रत्येक पंचायत स्तर पर हर महीने दो दिन कैंप लगाए जाएंगे। इन शिविरों में ब्लॉक, अंचल और थाना से संबंधित लोगों की समस्याओं का निर्धारित समयसीमा के भीतर समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को जनता के और करीब लाना ही इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
महिलाओं की सुरक्षा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बहन-बेटियों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार और पुलिस की है। उन्होंने निर्देश दिया कि स्कूल और कॉलेजों के आसपास पुलिस की विशेष तैनाती की जाए, ताकि छात्राओं को सुरक्षित वातावरण मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि लड़कियों की शिक्षा और सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
शिक्षा क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के सभी 534 प्रखंडों में मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों को इस स्तर का बनाया जाएगा कि आम गरीब परिवारों के बच्चों के साथ-साथ मंत्री और अधिकारियों के बच्चे भी वहां पढ़ने के इच्छुक हों। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा में समानता लाना ही इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा महतो साहब ने करीब 800 वर्ष पहले समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव का संदेश दिया था, जिसे आज भी अपनाने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और समाज में एकता बनाए रखें।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि मेले के सुचारू आयोजन के लिए जमीन अधिग्रहण किया जाएगा और मुख्य सड़क से मेले स्थल तक बेहतर सड़क निर्माण कराया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। उन्होंने कहा कि सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने रोजगार और निवेश को लेकर भी अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि राज्य में 1 करोड़ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है और इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने 20 नवंबर तक बिहार में 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य भी दोहराया।
कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, जदयू विधानमंडल दल के नेता श्रवण कुमार, सांसद कौशलेंद्र कुमार और विधायक जितेंद्र कुमार सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने बाबा महतो साहब के जीवन और उनके आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए समाज में उनके योगदान को याद किया।
इस अवसर पर कई मंत्री, विधायक, सांसद, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। लोगों ने मेले में बढ़-चढ़कर भाग लिया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद उठाया।
कुल मिलाकर, यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक एकता, विकास और जनसेवा के संदेश को भी मजबूती से प्रस्तुत करने वाला साबित हुआ। मुख्यमंत्री की घोषणाओं से क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


