
‘बिहार कोकिला’ को नमन — मुख्यमंत्री बोले, “उनकी मधुर आवाज सदैव गूंजती रहेगी”
पटना | बिहार
बिहार की मशहूर लोकगायिका और छठ गीतों की आत्मा कही जाने वाली शारदा सिन्हा की आज पहली पुण्यतिथि है। इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अमूल्य योगदान को याद किया।
नीतीश कुमार ने किया भावुक स्मरण
सीएम नीतीश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया—
“बिहार कोकिला, पद्म श्री एवं पद्म भूषण से सम्मानित स्व. शारदा सिन्हा जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।
उनके छठ महापर्व पर गाए मधुर गीत आज भी बिहार समेत देश के सभी हिस्सों में गूंजते हैं।
बिहार की भूमि, संगीत जगत और संगीत प्रेमियों में उनकी स्मृति सदैव जीवित रहेगी।”
छठ गीतों की पहचान थीं शारदा सिन्हा
शारदा सिन्हा को लोक संगीत की सबसे प्रभावशाली आवाजों में गिना जाता है।
लोगों ने उन्हें दो नाम दिए — “बिहार कोकिला” और “स्वर कोकिला”।
उनके छठ गीत आज भी हर घर में, हर घाट पर, पूजा-आरती और लोक परंपराओं में भाव जगाते हैं।
“फूलवा फूलनि चढ़ाइबो…”, “हे गंगाजी”, “उग हे सूरज देव” जैसे अनगिनत गीत भक्ति और परंपरा का प्रतीक बन चुके हैं।
मरणोपरांत मिला पद्म विभूषण
भारत सरकार ने इस वर्ष शारदा सिन्हा को पद्म विभूषण से मरणोपरांत सम्मानित किया।
इससे पहले उन्हें पद्मश्री और पद्म भूषण भी मिल चुके हैं।
यह सम्मान उनकी उस विरासत का प्रतीक है जिसने बिहार के लोकगीतों और छठ संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।
पीढ़ियों को जोड़ने वाली आवाज
शारदा सिन्हा ने अपने संगीत से न केवल बिहार बल्कि देश-विदेश में भी पहचान बनाई।
उनकी गायकी:
✅ लोक परंपरा का संरक्षण
✅ संस्कृति का स्वर
✅ आस्था का संगीत
✅ पीढ़ियों को जोड़ने वाली धरोहर
के रूप में आज भी जीवित है।
शारदा सिन्हा भले अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज और छठ भक्ति के गीत सदियों तक बिहार की संस्कृति में जीवित रहेंगे


