
पटना। बिहार के औद्योगिक और तकनीकी विकास को नई दिशा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के बिहटा में नवनिर्मित प्रौद्योगिकी केंद्र का उद्घाटन किया। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर, रोहतास, दरभंगा और मुंगेर में स्थापित चार एक्सटेंशन सेंटर का भी शुभारंभ किया गया। यह पहल राज्य में कौशल विकास, रोजगार सृजन और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह दिन बिहार के औद्योगिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने वाला है। उन्होंने बताया कि इन प्रौद्योगिकी केंद्रों में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को डिप्लोमा और डिग्री प्रदान की जाएगी, जिससे उन्हें न केवल बेहतर रोजगार मिलेगा, बल्कि वे स्वयं भी रोजगार सृजक बन सकेंगे।
कार्यक्रम का आयोजन पटना के बिहटा स्थित प्रौद्योगिकी केंद्र परिसर में किया गया, जहां मुख्यमंत्री ने रिमोट के माध्यम से सभी केंद्रों का उद्घाटन किया। इस दौरान केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में शिक्षा और कौशल विकास को सुलभ बनाने के लिए राज्य सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि बिहार देश का ऐसा राज्य है जहां इंजीनियरिंग की पढ़ाई का वार्षिक शुल्क मात्र 10 रुपये और डिप्लोमा का शुल्क मात्र 5 रुपये रखा गया है। यह व्यवस्था पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लागू की गई थी, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि राज्य के हर अनुमंडल में आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थान स्थापित किए गए हैं, जबकि हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज और मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है। इसका उद्देश्य युवाओं को बेहतर शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि वे देश और दुनिया में अपनी पहचान बना सकें।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में बिहटा स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) रिसर्च सेंटर स्थापित करने के लिए 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा कि इस सेंटर के बनने से बिहार वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर उभरेगा और देश-विदेश के विशेषज्ञ यहां आएंगे।
उन्होंने कहा कि बिहार की वर्तमान आबादी लगभग 14 करोड़ है, जो देश की अर्थव्यवस्था में जीएसटी के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी 20 नवंबर तक, जब सरकार का एक वर्ष पूरा होगा, तब तक राज्य में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाया जाए। इससे बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित होंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रौद्योगिकी केंद्रों में तीन प्रमुख क्षेत्रों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा—उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग। इससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी और छोटे उद्योगों को नई पहचान मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र से करीब 1 करोड़ 86 लाख लोग जुड़े हुए हैं, जिनका बाजार मूल्य लगभग 1 लाख करोड़ रुपये है। इस क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, पीएमईजीपी योजना, एससी/एसटी हब योजना और ग्राम उद्योग विकास योजना के लाभार्थियों को चेक, टूलकिट और प्रमाण पत्र वितरित किए। इससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और लोग आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने “सहयोग कार्यक्रम” का भी उल्लेख किया, जिसके तहत हर महीने दो दिन ब्लॉक, अंचल और थाना स्तर पर कैंप लगाकर लोगों की समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रशासन को जनता के और करीब लाएगी।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि जुलाई माह से राज्य के प्रत्येक ब्लॉक में डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे और हर प्रखंड में मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे, ताकि छात्रों को शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 1 करोड़ लोगों को रोजगार और नौकरी से जोड़ना है और इसके लिए हर स्तर पर काम किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकसित बिहार के सपने को हर हाल में पूरा किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी इस अवसर पर कहा कि यह पहल बिहार के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा और वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए सक्षम बनेंगे।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार, विकास आयुक्त डॉ. रजनीश, पुलिस महानिदेशक (ऑपरेशन) कुंदन कृष्णन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
अंततः, बिहटा में प्रौद्योगिकी केंद्र का उद्घाटन बिहार के विकास की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह पहल न केवल राज्य के युवाओं को नई दिशा देगी, बल्कि बिहार को आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और औद्योगिक रूप से समृद्ध बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


