HIGHLIGHTS: मोकामा के ‘बाहुबली’ को मिली बड़ी कानूनी राहत
- बड़ा फैसला: पटना हाई कोर्ट ने चर्चित दुलारचंद हत्याकांड मामले में पूर्व विधायक अनंत सिंह की जमानत याचिका मंजूर की।
- चुनावी रंजिश: जन सुराज के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या का था आरोप; विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी वारदात।
- जेल से बाहर: करीब 4.5 महीने बाद जेल की सलाखों से बाहर आएंगे अनंत सिंह; समर्थकों ने कहा- “शेर वापस आ रहा है।”
- सियासी हलचल: जमानत मिलते ही मोकामा से लेकर पटना तक की राजनीति में कयासों का दौर शुरू।
क्राइम फाइल: क्या था ‘दुलारचंद हत्याकांड’ का पूरा मामला?
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तारीख/समय |
घटनाक्रम |
विवरण |
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30 अक्टूबर |
खूनी झड़प |
तारतर गांव के पास JDU उम्मीदवार अनंत सिंह और जन सुराज के पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों में भिड़ंत। |
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30 अक्टूबर |
मौत |
झड़प के दौरान जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव का शव वाहन में मिला; गाड़ियों के शीशे टूटे। |
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31 अक्टूबर |
पुलिस दबिश |
SSP कार्तिकेय शर्मा भारी बल के साथ बाढ़ पहुंचे और अनंत सिंह को कस्टडी में लिया। |
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1 नवंबर |
गिरफ्तारी |
घोसवरी थाने में FIR के बाद देर रात प्रशासन ने अनंत सिंह की औपचारिक गिरफ्तारी का ऐलान किया। |
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19 मार्च 2026 |
जमानत |
पटना हाई कोर्ट ने सबूतों की कमी और दलीलों के आधार पर बेल मंजूर की। |
पटना | 19 मार्च, 2026
बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में से एक, ‘छोटे सरकार’ उर्फ अनंत सिंह के लिए आज का दिन बड़ी जीत लेकर आया। पटना हाई कोर्ट ने उन्हें उस हत्याकांड में जमानत दे दी है, जिसने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा की धरती को लाल कर दिया था।
अदालत में ‘दलीलों’ की जंग
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में पुरजोर तरीके से कहा कि अनंत सिंह को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है।
- बचाव पक्ष: “मामले में कोई ठोस प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। केवल राजनीतिक विरोध के कारण प्राथमिकी में नाम घसीटा गया है।”
- अभियोजन पक्ष: सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए इसे एक गंभीर अपराध बताया, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सशर्त जमानत दे दी।
मोकामा में ‘जन सुराज’ बनाम ‘JDU’ की पुरानी अदावत
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज’ ने मोकामा में पीयूष प्रियदर्शी को उतारकर अनंत सिंह के किले में सेंध लगाने की कोशिश की। दुलारचंद यादव उसी जन सुराज टीम का हिस्सा थे। उनकी मौत के बाद मोकामा में तनाव चरम पर था, जो अब अनंत सिंह की रिहाई के बाद फिर से सुलग सकता है।
VOB का नजरिया: क्या ‘किंग’ वापस अपनी ‘किंगडम’ संभालेगा?
अनंत सिंह का जेल से बाहर आना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि मोकामा की सत्ता का ‘शिफ्ट’ होना है। अनंत सिंह की छवि ‘रॉबिनहुड’ और ‘बाहुबली’ के बीच झूलती रही है, लेकिन मोकामा में उनकी पकड़ निर्विवाद है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि जन सुराज के उभरते प्रभाव के बीच अनंत सिंह की सक्रियता प्रशांत किशोर के ‘नए बिहार’ के दावों के लिए बड़ी चुनौती होगी। क्या अनंत सिंह अब शांत रहकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे या फिर एक बार फिर अपनी पुरानी आक्रामक राजनीति के जरिए विरोधियों को जवाब देंगे? मोकामा की जनता की नजरें अब उसी ‘सफेद कुर्ता-पायजामा’ और ‘मूंछों’ वाले अंदाज पर टिकी हैं।


