
HIGHLIGHTS: सरकार बनाम ‘कलमबंद’ अधिकारी
- दावा खारिज: बिहार राजस्व सेवा संयुक्त महासंघ ने सरकार के ‘300 सीओ के लौटने’ वाले दावे को बताया झूठ।
- हड़ताल की वजह: DCLR (भूमि सुधार उप समाहर्ता) के पदों पर केवल राजस्व सेवा के अफसरों की तैनाती की मांग।
- अल्टीमेटम: मांगें नहीं मानी गईं तो 100% अधिकारी जाएंगे सामूहिक अवकाश पर; ठप होगा जमीन का सारा काम।
- आदेश की अनदेखी: संघ का आरोप— सरकार हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं कर रही है।
पटना | 18 मार्च, 2026
बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज और सर्टिफिकेट बनवाने का काम फिलहाल ‘भगवान भरोसे’ है। 9 मार्च से शुरू हुई अंचलाधिकारियों (CO) और राजस्व अधिकारियों (RO) की हड़ताल ने अब ‘दावों की जंग’ का रूप ले लिया है। एक तरफ सरकार कह रही है कि अधिकारी काम पर लौट रहे हैं, तो दूसरी तरफ कर्मचारी संघ ने इसे सिरे से खारिज कर “आर-पार की लड़ाई” का ऐलान कर दिया है।
📊 हड़ताल का ‘महायुद्ध’: दावा बनाम हकीकत
पक्ष | प्रमुख दावा / स्थिति |
|---|---|
बिहार सरकार | 300 सीओ और राजस्व अधिकारी सामूहिक अवकाश से लौट आए हैं। |
राजस्व सेवा संघ | एक भी अधिकारी वापस नहीं लौटा; सरकार गलत आंकड़े पेश कर रही है। |
मुख्य मांग | DCLR के पद पर बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) की पोस्टिंग का कैबिनेट निर्णय रद्द हो। |
असर | दाखिल-खारिज (Mutation), एलपीसी और आय-जाति प्रमाण पत्र का काम ठप। |
जंग ‘कुर्सी’ की: क्या है बिहार राजस्व सेवा का संवर्ग विवाद?
राजस्व सेवा के अधिकारियों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह DCLR (Deputy Collector Land Reforms) की कुर्सी है।
- संवर्ग की मांग: संघ का कहना है कि DCLR का पद ‘बिहार राजस्व सेवा संवर्ग’ का हिस्सा होना चाहिए।
- कैबिनेट का पेंच: हाल ही में कैबिनेट ने इस पद पर ‘बिहार प्रशासनिक सेवा’ के अधिकारियों की पोस्टिंग का निर्णय लिया है, जिसका कड़ा विरोध हो रहा है।
- हाईकोर्ट का हवाला: महासचिव रजनीकांत और महामंत्री जितेन्द्र पांडेय ने दोटूक कहा है कि जब तक सरकार अपनी नीति नहीं बदलती, तब तक ‘सामूहिक अवकाश’ जारी रहेगा।
“सरकार हाईकोर्ट के आदेश का पालन करे” — संघ
संघ के नेताओं का आरोप है कि सरकार कानून और आदेशों की अनदेखी कर रही है।
”कोई भी अधिकारी काम पर नहीं लौटा है। हम अपनी मांगों पर अडिग हैं। अगर सरकार ने अविलंब ठोस कार्रवाई नहीं की, तो राज्य के शत-प्रतिशत अधिकारी सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन की होगी।”
— रजनीकांत, महासचिव, बिहार राजस्व सेवा संयुक्त महासंघ
VOB का नजरिया: अफसरों की लड़ाई में ‘आम आदमी’ पिसाई!
’द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि संवर्ग का विवाद प्रशासनिक हो सकता है, लेकिन इसका खामियाजा राज्य की जनता भुगत रही है। मार्च क्लोजिंग का समय है, और ऐसे में अंचलों में कामकाज ठप होना विकास की गति को रोकता है। सरकार को चाहिए कि वह संघ के साथ मेज पर बैठकर समाधान निकाले, बजाय इसके कि ‘संख्या बल’ के झूठे दावे किए जाएं। अगर 100% अधिकारी हड़ताल पर चले गए, तो बिहार का राजस्व विभाग पूरी तरह ‘वेंटिलेटर’ पर चला जाएगा।


