खगड़िया में ‘रिश्तों’ की नई पटकथा? चिराग पासवान ने पशुपति पारस के छुए पैर, सियासी कड़वाहट के बीच दिखी पारिवारिक मर्यादा; वीडियो वायरल

HIGHLIGHTS: पासवान परिवार के पैतृक गांव ‘शहरबन्नी’ में पिघली बर्फ! श्रद्धांजलि सभा के गमगीन माहौल में ‘चाचा-भतीजा’ का भावुक मिलन

  • बड़ी मुलाकात: खगड़िया के अलौली स्थित पैतृक गांव में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के बीच हुई लंबी बातचीत।
  • मर्यादा का परिचय: चचेरे चाचा के निधन पर आयोजित सभा में पहुंचे चिराग ने चाचा पारस को देखते ही उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
  • पारस का स्नेह: तमाम राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर पशुपति पारस ने भी भतीजे के सिर पर हाथ रखकर प्यार लुटाया।
  • कुशलक्षेम: औपचारिक अभिवादन के बाद दोनों नेताओं के बीच कुछ पलों तक पारिवारिक और निजी विषयों पर चर्चा हुई।
  • VOB इनसाइट: राम विलास पासवान की विरासत को लेकर मची रार के बीच इस मुलाकात ने बिहार की राजनीति में ‘मर्जर’ या ‘सुलह’ की नई अटकलों को जन्म दे दिया है।

खगड़िया / पटना | 25 मार्च, 2026

​बिहार की राजनीति में ‘चाचा-भतीजा’ की रार जगजाहिर है, लेकिन सोमवार को खगड़िया के अलौली स्थित शहरबन्नी गांव से आई तस्वीरों ने सबको हैरान कर दिया। पैतृक गांव में एक पारिवारिक शोक सभा के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और उनके सगे चाचा व पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस का आमना-सामना हुआ। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही चिराग की नजर अपने चाचा पर पड़ी, उन्होंने बिना देरी किए शिष्टाचार दिखाते हुए उनके पैर छुए। इस पल ने वहां मौजूद लोगों और सोशल मीडिया पर इस वीडियो को देखने वालों को भावुक कर दिया।

गमगीन माहौल में ‘रिश्तों’ की गर्माहट: शहरबन्नी में दिखा पुराना प्रेम

​मौका चिराग पासवान के चचेरे चाचा के निधन पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा का था। पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस वहां पहले से मौजूद थे। जैसे ही चिराग पासवान कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, उन्होंने सबसे पहले अपने बड़े बुजुर्गों का अभिवादन किया। चाचा पारस को देखते ही चिराग ने झुककर उनके पैर छुए, जिसके जवाब में पारस ने भी अपनी पुरानी नाराजगी भुलाकर चिराग के सिर पर हाथ रखा और उन्हें आशीर्वाद दिया।

​मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने कुछ समय तक एक-दूसरे का हाल-चाल जाना। हालांकि, यह मुलाकात पूरी तरह से पारिवारिक और गैर-राजनीतिक बताई जा रही है, लेकिन बिहार के सियासी गलियारों में इसके गहरे मायने निकाले जा रहे हैं।

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