
पटना। मजदूर दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी पटना में एक अलग ही राजनैतिक सरगर्मी देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने न केवल मजदूरों के सम्मान की बात की, बल्कि समकालीन राजनीति के कई जलते हुए मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। चिराग पासवान ने अपनी सधी हुई लेकिन कड़े शब्दों वाली शैली में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी द्वारा दिए गए हालिया बयानों पर अपनी गहरी असहमति और आपत्ति दर्ज कराई है। चिराग ने स्पष्ट किया कि राजनीति में शब्दों की मर्यादा सबसे ऊपर होती है और जब कोई व्यक्ति जिम्मेदार पद पर बैठा हो, तो उसे जनता की भावनाओं और मानवीय संवेदनाओं का विशेष ख्याल रखना चाहिए। शुक्रवार, 01 मई 2026 को आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान चिराग ने बिहार की गिरती कानून-व्यवस्था के दावों पर विपक्ष को करारा जवाब दिया और दिल्ली में हुई एक दुखद घटना पर क्षेत्रवाद की राजनीति करने वालों को आड़े हाथों लिया।
शब्दों की मर्यादा पर जीतन राम मांझी को सलाह: ‘संवेदनशीलता अनिवार्य है’
राजनैतिक गलियारों में पिछले कुछ दिनों से पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का एक कथित बयान चर्चा का विषय बना हुआ था। इस मुद्दे पर जब चिराग पासवान से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के मांझी को नसीहत दे डाली। चिराग पासवान ने कहा कि किसी के निधन या मृत्यु पर ‘मर गया तो मर गया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना न केवल भाषाई गिरावट है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में संवेदनशीलता के अभाव को भी दर्शाता है। चिराग ने जोर देते हुए कहा कि जो लोग मुख्यमंत्री जैसे गरिमामय पद पर रह चुके हों, उनकी बातों का समाज में गहरा असर पड़ता है और ऐसी अमानवीय भाषा समाज में गलत संदेश प्रसारित करती है।
चिराग ने नसीहत देते हुए कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों को बोलते समय संयम और शालीनता का परिचय देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का जीवन अनमोल होता है और उसकी मृत्यु पर इस तरह की उदासीनता दिखाना किसी भी सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने आग्रह किया कि राजनेताओं को अपनी वाणी में करुणा और संवेदनशीलता लानी चाहिए ताकि जनता का उन पर विश्वास बना रहे।
दिल्ली में बिहारी युवक की हत्या: क्षेत्रवाद के खिलाफ चिराग की हुंकार
चिराग पासवान ने दिल्ली में बिहार के एक युवक की हत्या के मामले को लेकर अपनी गहरी पीड़ा और चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस घटना को केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक पहचान पर हमला करार दिया। चिराग ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में सिर्फ ‘बिहारी’ होने की वजह से किसी के साथ भेदभाव, हिंसा या अन्याय होना लोकतंत्र के माथे पर कलंक है। उन्होंने क्षेत्रवाद की जहर वाली राजनीति पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में सुरक्षित रहने और काम करने का अधिकार देता है।
उन्होंने इस मामले में दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार से सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की। चिराग ने कहा कि जब किसी बिहारी युवक के साथ ऐसी घटना होती है, तो यह पूरे बिहार के स्वाभिमान को चोट पहुँचाती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पहचान के आधार पर हिंसा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और कानून को ऐसे अपराधियों को ऐसा सबक सिखाना चाहिए कि भविष्य में कोई भी क्षेत्रवाद के नाम पर किसी निर्दोष का खून न बहा सके।
एनकाउंटर पर विपक्ष को जवाब: ‘अपराधी का कोई जाति समीकरण नहीं होता’
बिहार में पिछले कुछ दिनों से अपराधियों के खिलाफ पुलिस द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई और मुठभेड़ों (एनकाउंटर) को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार चुन-चुनकर एक खास वर्ग या जाति के लोगों पर कार्रवाई कर रही है। इन आरोपों पर पलटवार करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि जो लोग वर्षों से केवल ‘जातीय समीकरण’ की रोटियां सेंकते रहे हैं, वही आज कानून के काम में बाधा डाल रहे हैं।
चिराग ने दोटूक कहा कि अपराधी केवल अपराधी होता है, उसकी कोई जाति या धर्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की पहली प्राथमिकता है और इसके लिए अपराधियों पर कठोर कार्रवाई होना नितांत आवश्यक है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब अपराधी मासूमों की जान लेते हैं, तब ये नेता चुप्पी साध लेते हैं, लेकिन जब पुलिस अपराधियों को उनके किए की सजा देती है, तब इन्हें जाति याद आने लगती है। चिराग ने सरकार के इस रुख का समर्थन किया कि भयमुक्त समाज के लिए अपराधियों के मन में कानून का खौफ होना जरूरी है।
मजदूर दिवस पर कार्यकर्ताओं को मूल मंत्र: ‘अन्याय के खिलाफ ढाल बनें’
मजदूर दिवस के पावन अवसर पर चिराग पासवान ने अपनी पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कार्यकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज बनें। चिराग ने कहा कि लोजपा (रा) का हर कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करे कि उसके आसपास किसी भी गरीब, असहाय या मजदूर के साथ कोई अन्याय न होने पाए।
उन्होंने सामाजिक न्याय और गरीबों के सम्मान को पार्टी की मूल विचारधारा बताया। चिराग ने कार्यकर्ताओं से सक्रिय रहने का आह्वान करते हुए कहा कि केवल राजनीति करना हमारा लक्ष्य नहीं है, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और मानवता को बचाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मजदूर ही राष्ट्र के निर्माण की धुरी हैं और यदि उनके पसीने का सम्मान नहीं होगा, तो समाज का विकास रुक जाएगा। चिराग ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे हर जरूरतमंद की मदद के लिए तैयार रहें और अन्याय के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाएं।
राष्ट्रीय राजनीति और बिहार का भविष्य
चिराग पासवान के इन बयानों से यह साफ हो गया है कि वे आने वाले समय में बिहार की राजनीति में एक ‘बैलेंस्ड’ (संतुलित) लेकिन मजबूत छवि के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। एक तरफ जहाँ वे अपनी गठबंधन सरकार की कार्रवाई का मजबूती से समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे गठबंधन के ही वरिष्ठ नेताओं को सार्वजनिक मर्यादा की याद दिलाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। उनकी ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ की नीति अब केवल नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली जैसी घटनाओं पर उनका आक्रामक रुख इसे धरातल पर उतारने की कोशिश दिखा रहा है। मजदूर दिवस पर दिया गया उनका यह संबोधन न केवल श्रमिकों के प्रति उनकी सहानुभूति को दर्शाता है, बल्कि उनकी पार्टी की भविष्य की उस दिशा को भी तय करता है जहाँ वे खुद को गरीबों और दलितों के साथ-साथ हर उस व्यक्ति के मसीहा के रूप में स्थापित करना चाहते हैं जो व्यवस्था की मार झेल रहा है।


