HIGHLIGHTS: रसोई गैस के ‘बैकलॉग’ पर सरकार का मेगा-एक्शन प्लान
- हाई-लेवल मीटिंग: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में DGP, सभी DM और SP के साथ हुई आपातकालीन बैठक।
- जीरो टॉलरेंस: अवैध भंडारण रोकने के लिए सीमावर्ती जिलों (Border Districts) में सघन छापेमारी के निर्देश।
- रोजाना अपडेट: अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए हर जिले के DPRO प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस।
- कंट्रोल रूम: आम जनता की शिकायतों के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम को 24×7 सक्रिय करने का आदेश।
📊 एक्शन प्लान ‘फाइल’ रिकॉर्ड: गैस आपूर्ति बहाली की रणनीति
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निर्देश (Order) |
जिम्मेदार अधिकारी |
मुख्य उद्देश्य (Objective) |
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प्रतिदिन प्रेस कॉन्फ्रेंस |
जिला जनसंपर्क पदाधिकारी (DPRO) |
अफवाहों को रोकना और वास्तविक स्थिति बताना। |
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सघन छापेमारी (Raids) |
सभी DM एवं SP |
कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर अंकुश। |
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बैकलॉग क्लियरेंस |
सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण |
गैस सिलेंडरों के वितरण में तेजी लाना। |
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शिकायत निवारण |
जिला कंट्रोल रूम |
आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान। |
पटना | 19 मार्च, 2026
बिहार में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर मची अफरा-तफरी और ‘बैकलॉग’ की समस्या पर अब सीधे मुख्य सचिव ने कमान संभाल ली है। आज मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट कर दिया कि गैस वितरण में किसी भी प्रकार की कोताही या अवैध खेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी तलब किया गया ताकि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की बाधाओं को तुरंत दूर किया जा सके।
“अफवाह फैलाना पड़ेगा भारी” — सरकार की सख्त चेतावनी
अक्सर देखा गया है कि गैस की कमी की ‘फेक न्यूज’ से लोग पैनिक बुकिंग शुरू कर देते हैं, जिससे कृत्रिम किल्लत पैदा होती है। इसे रोकने के लिए सरकार ने नया ‘कम्युनिकेशन मॉडल’ अपनाया है:
- 3 बजे का बुलेटिन: हर जिले का प्रशासन अब दोपहर 3:00 बजे मीडिया के सामने आकर बताएगा कि उस दिन जिले में कितने सिलेंडर आए और कितने वितरित हुए।
- बॉर्डर पर पहरा: यूपी, झारखंड और नेपाल से सटे जिलों में गैस सिलेंडरों की तस्करी और अवैध स्टॉक की खबरें मिलने के बाद, मुख्य सचिव ने वहां विशेष छापेमारी दल तैनात करने का निर्देश दिया है।
VOB का नजरिया: क्या ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस’ से शांत होंगे चूल्हे?
बिहार सरकार का यह कदम पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ी पहल है। अक्सर प्रशासन और जनता के बीच ‘सूचना के अभाव’ (Information Gap) के कारण ही कालाबाजारी करने वालों की चांदी हो जाती है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की यह ‘उद्योग वार्ता’ जैसी ही सक्रियता गैस संकट को सुलझाने में प्रभावी होगी। लेकिन असली चुनौती जिला स्तर पर है—क्या DPRO हर दिन सही आंकड़े पेश कर पाएंगे? और क्या पुलिस वास्तव में उन बड़े ‘स्टॉकिस्टों’ पर हाथ डालेगी जो संकट के समय चांदी काट रहे हैं?


