पटना | 21 फरवरी, 2026: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने महत्वाकांक्षी विजन ‘सात निश्चय-3 (2025-30)’ को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने सातवें निश्चय— ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ (Ease of Living) के तहत राज्य के पैदल यात्रियों के लिए कई क्रांतिकारी बदलावों का रोडमैप साझा किया है।
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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बिहार की सड़कों पर सुरक्षित और सम्मानपूर्वक चलना अब केवल जरूरत नहीं, बल्कि नागरिकों का पहला अधिकार होगा।
पैदल चलने वालों के ‘सम्मान’ के लिए 5 बड़े फैसले
सड़कों पर बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच पैदल चलने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग को निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं:
- शहरी क्षेत्रों में फुटपाथ का जाल: राज्य के सभी शहरी और अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले इलाकों को चिह्नित कर वहां प्राथमिकता के आधार पर फुटपाथ बनाए जाएंगे।
- आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: प्रमुख चौराहों और व्यस्त सड़कों पर पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए फुट ओवर ब्रिज (FOB), एस्केलेटर और अंडरपास का निर्माण किया जाएगा।
- जेब्रा क्रॉसिंग की अनिवार्यता: सड़कों को पार करने में होने वाली असुविधा को खत्म करने के लिए चिह्नित स्थानों पर स्पष्ट जेब्रा क्रॉसिंग बनाई जाएगी।
- ड्राइवरों की ‘सेंसिटिविटी’ ट्रेनिंग: सरकारी और निजी वाहन चालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे सड़कों पर पैदल चलने वालों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनें और उन्हें रास्ता दें।
- ब्लैक स्पॉट पर तीसरी नजर: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (Black Spots) को चिह्नित कर वहां CCTV कैमरे लगाए जाएंगे और पैदल यात्रियों के लिए विशेष फुटपाथ निर्माण होगा, ताकि सड़क हादसों में कमी लाई जा सके।
बढ़ते वाहनों के बीच ‘पैदल यात्री’ प्राथमिकता पर
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि बिहार की बढ़ती तरक्की और राज्यवासियों की बढ़ती आमदनी के कारण सड़कों पर दो पहिया और चार पहिया वाहनों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। ऐसे में पैदल चलने वाले लोग सबसे अधिक असुरक्षित महसूस करते हैं।
”सड़क पर सुरक्षित और सम्मानपूर्वक चलना पैदल चलने वाले लोगों का पहला अधिकार है। हमने परिवहन विभाग को इन सुविधाओं को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने का निर्देश दिया है ताकि बिहार के हर नागरिक का दैनिक जीवन आसान हो सके।”
— नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री
द वॉयस ऑफ बिहार का विश्लेषण
सरकार का यह कदम केवल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘सड़क संस्कृति’ (Road Culture) को बदलने की एक कोशिश है। विकसित देशों की तर्ज पर पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देना बिहार के शहरी विकास मॉडल में एक नया अध्याय जोड़ेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


