आपातकाल की बरसी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का संकल्प : “लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव सजग रहेंगे”

 आपातकाल को बताया स्वतंत्र भारत का काला अध्याय, जेपी आंदोलन की याद की ताजा

पटना, 25 जून 2025: 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की 50वीं बरसी पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक भावनात्मक ट्वीट के माध्यम से उस दौर की तानाशाही, लोकतंत्र की कुचली गई आवाज़ और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए जन आंदोलन को याद किया।

मुख्यमंत्री ने कहा, “25 जून 1975 का वो दिन हम सभी को याद है, जब देश में आपातकाल लागू हुआ था। इसे स्वतंत्र भारत के इतिहास का काला दिन कहा जाता है।” उन्होंने इसे तत्कालीन सरकार की तानाशाही सोच का परिणाम बताते हुए कहा कि उस समय जनता की अभिव्यक्ति की आज़ादी पर खुलकर पाबंदी लगा दी गई थी

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नीतीश कुमार ने याद किया कि जेपी आंदोलन के दौरान वे स्वयं भी कई साथियों के साथ सक्रिय रूप से आपातकाल के विरोध में शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि तानाशाही के विरुद्ध आवाज़ उठाने की कीमत उन्हें और उनके साथियों को जेल जाकर चुकानी पड़ी, लेकिन देशवासियों ने अदम्य साहस और एकता का परिचय देते हुए लोकतंत्र की पुनर्स्थापना की लड़ाई लड़ी।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि “लोकतंत्र के मूल में जनता की आवाज़ होती है”, और यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि हर परिस्थिति में उसकी रक्षा की जाए। उन्होंने इस अवसर पर यह भी दोहराया कि बिहार की पहचान हमेशा संविधान, न्याय, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के मूल्यों से रही है और यही उसके विकास का मार्गदर्शक रहा है।

नीतीश कुमार ने अपने संदेश के अंत में स्पष्ट रूप से कहा —
“हमारा यह संकल्प रहे कि हम संविधान के आदर्शों की रक्षा के लिए सदैव सजग एवं तत्पर रहेंगे।”

यह वक्तव्य न केवल आपातकाल के दमनकारी अतीत की याद दिलाता है, बल्कि लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के प्रति मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है।

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