पटना। बिहार की ऐतिहासिक धरोहर और राजधानी पटना की पहचान माने जाने वाले गोलघर का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। इस दौरान जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा भी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे।
अधिकारियों से ली संरचना और सुविधाओं की जानकारी
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से गोलघर की वर्तमान संरचनात्मक स्थिति, लाइट, साउंड एवं लेजर शो सहित अन्य सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने गोलघर को पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक और सुरक्षित बनाने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक विरासत
पटना का गोलघर ब्रिटिश शासन काल में बनाया गया था। 1770 के भीषण अकाल के बाद अनाज भंडारण और अकाल की रोकथाम के उद्देश्य से कैप्टन जॉन गार्स्टिन द्वारा इसका निर्माण कराया गया।
- निर्माण कार्य: 20 जुलाई 1786 को पूरा
- उद्देश्य: ब्रिटिश सेना के लिए अनाज भंडारण
गोलघर की अनोखी संरचना
गोलघर अपनी वास्तुकला के कारण देशभर में प्रसिद्ध है।
- अनाज भंडारण क्षमता: 1,40,000 टन
- वास्तुकला: स्तूप शैली
- ऊंचाई: 29 मीटर
- दीवार की मोटाई: 3.6 मीटर
- खंभे: एक भी नहीं
- सीढ़ियां: 145 घुमावदार सीढ़ियां
जीर्णोद्धार के कारण लंबे समय से बंद
पटना आने वाले पर्यटकों के लिए गोलघर हमेशा प्रमुख आकर्षण रहा है, लेकिन 2017 से इसके जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है।
कोविड महामारी के कारण भी कार्य प्रभावित हुआ। बीच में कुछ समय के लिए इसे खोला गया, लेकिन आगे के विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर फिर से बंद कर दिया गया।
चढ़ने की अनुमति भी रही बंद
2013 से मुख्यमंत्री के निर्देश पर गोलघर में लाइटिंग सहित अन्य सुविधाओं का विकास किया गया था। लोग गोलघर का भ्रमण कर ऊपर से पटना का नजारा देखते थे, लेकिन लंबे समय से गोलघर पर चढ़ने की अनुमति नहीं थी।
आम लोगों के लिए जल्द खुलेगा गोलघर
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निरीक्षण के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही आम लोग फिर से गोलघर पर चढ़ सकेंगे। इससे पटना घूमने आने वाले पर्यटकों को बाहर से देखने तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि वे ऊपर से शहर का नजारा भी देख सकेंगे।


