मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नवगछिया में बिंदटोली गंगा तटबंध का ले सकते हैं जायजा, कटाव स्थल का हवाई सर्वेक्षण भी संभव

गंगा में जलस्तर स्थिर लेकिन खतरा बरकरार

भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल स्थित बिंदटोली गंगा तटबंध के टूटने से संभावित बाढ़ आपदा को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को यहां का दौरा कर सकते हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री स्पर संख्या 9 के समीप हुए कटाव स्थल का निरीक्षण करेंगे और संभव है कि वे इस्माइलपुर-बिंदटोली क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण भी करें।
गौरतलब है कि बिंदटोली तटबंध बिंद टोली गांव के पास लगभग 300 से 400 मीटर की लंबाई में ध्वस्त हो चुका है, जिससे आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर जलभराव और जनहानि का खतरा उत्पन्न हो गया है। हालांकि, अभी तक मुख्यमंत्री के आगमन का सटीक समय और कार्यक्रम की प्रशासनिक पुष्टि नहीं हुई है।

गंगा का जलस्तर स्थिर, लेकिन बाढ़ का खतरा अभी भी टला नहीं

फरक्का बैराज के 101 गेट खोले जाने के बाद सोमवार शाम से गंगा का जलस्तर भागलपुर में स्थिर हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आएगी, जिससे राहत की उम्मीद जगी है।
फिर भी, खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जलसैलाब फैला हुआ है। पिछले 24 घंटों में जलस्तर में केवल 3 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि वर्तमान में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 97 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है।

प्रभावित क्षेत्र और स्थानीय चिंता

सबौर क्षेत्र के इंग्लिश गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर बार-बार पानी का बहाव हो रहा है, जिसे अस्थायी डायवर्जन बनाकर नियंत्रित किया जा रहा है। वहीं, गोराडीह मुख्य मार्ग पर जमसी के पास बाढ़ का पानी सड़क पार करने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता और बढ़ गई है।

शिक्षा संस्थान भी बाढ़ की चपेट में

बाढ़ ने भागलपुर के शैक्षणिक संस्थानों की गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित किया है।

  • तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर में अब नावों से आवाजाही हो रही है।
  • भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज चारों ओर से गंगा के पानी से घिर चुका है और हॉस्टल को खाली करा लिया गया है।
  • बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के अनुसंधान प्रक्षेत्र में लगी रिसर्च फसलें भी जलमग्न हो चुकी हैं।

राहत एवं बचाव कार्य

बाढ़ प्रभावित इलाकों में सरकार ने राहत शिविर और सामुदायिक किचन की व्यवस्था की है। कई स्थानों पर नावों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, गंगा के भीषण सैलाब के सामने ये प्रयास कई जगहों पर नाकाफी साबित हो रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने, ऊंचे स्थानों पर जाने और अफवाहों से बचने की अपील की है।


 

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