सहरसा में 12 गोलियों से छलनी किया छोटू मिश्रा का शरीर; सिनेमा हॉल के बाहर रूह कंपा देने वाला कत्ल

HIGHLIGHTS:

  • भीषण वारदात: सहरसा के मीरा सिनेमा गेट के पास 30 वर्षीय युवक की सरेआम हत्या।
  • गोलियों की तड़तड़ाहट: बदमाशों ने बरसाईं ताबड़तोड़ गोलियां; पुलिस ने मौके से बरामद किए 12 खोखे।
  • निशाना: सीने और आंखों में मारी गोली; हेलमेट पहनकर आए थे 4-5 शूटर।
  • दहशत: विद्यापति नगर निवासी छोटू मिश्रा के कत्ल से शहर में तनाव, पुलिस छावनी में तब्दील इलाका।

आधी रात, सहरसा की सड़कें और ‘मौत’ का तांडव!

सहरसा: रेशमी नगरी भागलपुर के बाद अब सहरसा की धरती गोलियों की गूँज से थर्रा उठी है। शुक्रवार की देर रात जब शहर सोने की तैयारी कर रहा था, ठीक उसी वक्त सदर थाना क्षेत्र के मीरा सिनेमा गेट के पास अपराधियों ने खूनी खेल खेला। विद्यापति नगर के रहने वाले छोटू मिश्रा (30 वर्ष) को अपराधियों ने इतनी बेरहमी से मारा कि देखने वालों की रूह कांप गई। बदमाशों ने उन्हें संभलने का एक मौका भी नहीं दिया और देखते ही देखते मौके को ‘कत्लगाह’ बना दिया।

[क्राइम फाइल: 12 राउंड फायरिंग और ‘प्लान्ड’ मर्डर]

​पुलिस की शुरुआती जांच और चश्मदीदों के मुताबिक, यह कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची-समझी ‘सुपारी किलिंग’ या रंजिश का नतीजा लग रहा है।

आंखों में मारी गोली… नफरत या दहशत फैलाने की कोशिश?

​वारदात का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि हमलावरों ने छोटू मिश्रा के सीने और सीधे आंखों को निशाना बनाया। जानकारों की मानें तो आंखों में गोली मारना इस बात का संकेत है कि अपराधी मृतक से भीषण नफरत करते थे या फिर शहर में अपनी दहशत का सिक्का जमाना चाहते थे। छोटू अपनी गाड़ी में सवार थे, तभी हेलमेट पहने बाइक सवार शूटरों ने उन्हें घेर लिया और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

SADAR SDPO का बयान: “अपराधी पाताल में भी होंगे तो ढूंढ निकालेंगे”

​घटना की जानकारी मिलते ही सदर एसडीपीओ आलोक कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।

​”देर रात हुई इस वारदात के पीछे के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने 12 खोखे और एक गाड़ी बरामद की है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। अपराधियों की पहचान के लिए विशेष टीम का गठन कर दिया गया है।” — आलोक कुमार, एसडीपीओ

VOB का नजरिया: क्या ‘खाकी’ का इकबाल खत्म हो रहा है?

सहरसा के पॉश इलाके में, सिनेमा हॉल जैसे सार्वजनिक स्थल के पास 12 राउंड फायरिंग होना पुलिस के गश्ती दावों पर बड़ा सवालिया निशान है। अपराधी हेलमेट पहनकर आते हैं, इत्मीनान से कत्ल करते हैं और फरार हो जाते हैं। 12 गोलियां चलना यह बताता है कि उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं था। छोटू मिश्रा की हत्या ने एक बार फिर बिहार की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि सहरसा पुलिस इन ‘हेलमेट वाले शूटरों’ के चेहरों से नकाब कब तक हटा पाती है।

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