भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर चौरचन पर्व: मिथिलांचल में श्रद्धा और उल्लास से होगी चंद्रमा की पूजा

भागलपुर, 25 अगस्त 2025 – भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के अवसर पर मंगलवार को पूरे मिथिलांचल और आसपास के क्षेत्रों में पारंपरिक चौरचन पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन गणेश चौठ के साथ-साथ विशेष रूप से चंद्रमा की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना के साथ चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करेंगे।

शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि

तिलकामांझी महावीर मंदिर के पंडित आनंद झा ने बताया कि इस वर्ष शाम 6:25 बजे से 7:55 बजे तक चंद्र दर्शन का शुभ समय रहेगा।

  • व्रतीजन नए मिट्टी या पीतल के बर्तन में जमाया हुआ दही, मौसमी फल और घर में बने पकवान लेकर आकाश में उदित चंद्रमा को अर्घ्य देंगे।
  • महिलाएं विशेष रूप से परिवार की दीर्घायु और कल्याण के लिए व्रत रखकर पूजा करती हैं।
  • मान्यता है कि इस दिन दही और फल के साथ चंद्रमा के दर्शन करने से जीवन में कोई भी मिथ्या कलंक नहीं लगता।

गणेश जी का श्राप और चतुर्थी का महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार गणेश जी चंद्रलोक में भोज हेतु गए थे। वापसी में उनके हाथ से लड्डू गिर पड़ा, जिस पर चंद्रमा हंस पड़े

  • इससे क्रोधित होकर गणेश जी ने चंद्रमा को श्राप दिया कि जो कोई तुम्हें देखेगा, वह मिथ्या कलंक का शिकार होगा।
  • भयभीत चंद्रदेव ने क्षमा मांगी, तब गणेश जी ने श्राप को केवल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तक सीमित कर दिया।
  • साथ ही यह वरदान भी दिया कि इस दिन चंद्रमा की पूजा करने वाले भक्तों को कभी झूठे कलंक का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मिथिलांचल में क्यों खास है चौरचन?

इतिहासकार और पंडित बताते हैं कि जब चंद्रमा श्रापित हुए थे, तब लोगों ने उनकी पूजा करना बंद कर दिया। लेकिन श्रापमुक्त होने के बाद मिथिलांचल क्षेत्र में चंद्रमा की पूजा फिर से शुरू हुई और समय के साथ यह परंपरा चौरचन पर्व के रूप में प्रचलित हो गई।

  • इस दिन घर-घर में पकवान, दही-चूड़ा, मौसमी फल और मिठाइयों का विशेष भोग तैयार किया जाता है।
  • शाम को महिलाएं व्रत रखकर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और परिवार के सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु और परिवारजनों के कल्याण की कामना करती हैं।
  • कई जगह इस पर्व को गणेश चौठ के नाम से भी जाना जाता है।

आस्था और उल्लास का संगम

भागलपुर और मिथिलांचल के विभिन्न हिस्सों में इस पर्व को लेकर बाजारों में रौनक देखी जा रही है। पूजा के लिए दही, फल, मिठाई और पूजन सामग्री की खरीददारी में लोग जुटे हैं। शाम को छतों और आंगनों से लोग चांद को अर्घ्य अर्पित करते हुए गीत-भजन गाते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।


 

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