पटना: पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर शनिवार को बड़ा बवाल हो गया। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पटना आगमन पर एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इसी दौरान उनकी भिड़ंत भाजपा युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ताओं से हो गई। देखते ही देखते स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की और मारपीट तक हो गई।
विरोध प्रदर्शन और झड़प
एनएसयूआई के छात्रों ने मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को काला झंडा दिखाने की कोशिश की। छात्रों का कहना था कि उनका विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक था। लेकिन इसी बीच भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए और नारेबाजी के बीच दोनों गुटों में तनाव बढ़ गया। मामला बढ़ते-बढ़ते मारपीट तक पहुंच गया।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
हालात बिगड़ते देख मौके पर मौजूद पुलिस ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया। पुलिस ने किसी तरह स्थिति को काबू में किया। झड़प में कुछ छात्रों को हल्की चोटें आईं, हालांकि कोई गंभीर घटना नहीं हुई।
एनएसयूआई का आरोप
एनएसयूआई संयोजक शाश्वत शेखर ने कहा,
“विरोध शांतिपूर्ण था। हम सिर्फ मंत्री जी को यह बताना चाहते थे कि पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाए। काला झंडा दिखाना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने जानबूझकर हमसे भिड़ गए।”
गौरवशाली इतिहास, बदहाली की हकीकत
पटना विश्वविद्यालय को कभी ‘बिहार का ऑक्सफोर्ड’ कहा जाता था। लंबे समय तक यह पूर्वी भारत का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र रहा। लेकिन समय के साथ विश्वविद्यालय की स्थिति कमजोर होती चली गई। छात्रों की वर्षों पुरानी मांग है कि इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाए ताकि इसकी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस लौट सके।


