भागलपुर/खरीक | 25 फरवरी, 2026: बिहार के भागलपुर जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। खरीक बाजार इलाके में मंगलवार दोपहर एक घर के आंगन की कच्ची दीवार गिरने से दो मासूम बच्चों की दबकर मौत हो गई। जो बच्चे कुछ पल पहले आंगन में किलकारियां भर रहे थे, अचानक मिट्टी की दीवार उनके लिए कब्र बन गई। इस हादसे के बाद पूरे खरीक बाजार में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
दोपहर 12 बजे का वो ‘खौफनाक’ मंजर
घटना मंगलवार दोपहर करीब 12:00 बजे की है। जानकारी के अनुसार, खरीक बाजार निवासी राम प्रमोद चौधरी का 3 वर्षीय पुत्र कृष्णा कुमार और उसकी सहेली 5 वर्षीया निधि कुमारी आंगन में एक साथ खेल रहे थे। इसी बीच आंगन की पुरानी मिट्टी की दीवार अचानक भरभराकर दोनों बच्चों के ऊपर गिर गई। भारी मलबे के नीचे दबने से दोनों बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए।
अस्पताल में टूटी उम्मीदें: डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
दीवार गिरने की तेज आवाज सुनकर घरवाले और आसपास के लोग मौके पर दौड़े। आनन-फानन में मलबे को हटाकर दोनों बच्चों को बाहर निकाला गया।
- भागदौड़: परिजनों ने बच्चों को पहले स्थानीय पीएचसी (PHC) पहुँचाया, जहाँ से उनकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत भागलपुर के मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया।
- अंतिम सांस: मायागंज अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल के गलियारे बच्चों की माँ की चीखों से दहल उठे।
परिजनों का बुरा हाल, अस्पताल में बार-बार बेहोश हुई मां
राम प्रमोद चौधरी ने बरारी कैंप थाने में अपना बयान दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि खेलते समय सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक हुई इस अनहोनी ने उनका सब कुछ छीन लिया। अस्पताल में दोनों बच्चों की मां की स्थिति बेहद दयनीय थी; वे बार-बार बच्चों का नाम पुकारते हुए बेहोश हो जा रही थीं। पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराकर उन्हें परिजनों को सौंप दिया है।
प्रशासनिक जांच: पुलिस खंगाल रही हादसे की वजह
खरीक थानाध्यक्ष नरेश कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि हादसा बेहद दुखद है। पुलिस इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है कि दीवार गिरने का मूल कारण क्या था—क्या दीवार अत्यधिक पुरानी और जर्जर थी या किसी और कारण से यह हादसा हुआ।
VOB का नजरिया: कच्ची दीवारें और अनकहा खतरा
भागलपुर के खरीक की यह घटना हमें चेतावनी देती है कि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में पुरानी और कच्ची दीवारें बच्चों के लिए साइलेंट किलर साबित हो रही हैं। मासूमों को क्या पता था कि जिस आंगन को वे अपनी दुनिया समझते हैं, वहीं मौत उनका इंतजार कर रही है। प्रशासन को चाहिए कि आपदा प्रबंधन के तहत पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द आर्थिक मुआवजा उपलब्ध कराए ताकि उन्हें इस दुख की घड़ी में कुछ सहारा मिल सके।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


