• Mon. Jun 27th, 2022

चंद्रबाबू नायडू ने भी की थी एकनाथ शिंदे जैसी बगावत, ससुर की पार्टी और CM की कुर्सी दोनों पर कर लिया था कब्जा

ByShailesh Kumar

Jun 23, 2022

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के बागी होने के बाद न केवल महाविकास अघाड़ी की सरकार पर बल्कि शिवसेना पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने यहां तक कह दिया कि अगर विधायक सामने आकर कह दें कि वह उनके नेतृत्व में काम नहीं करना चाहते तो वह न केवल मुख्यमंत्री पद से बल्कि शिवसेना अध्यक्ष के पद से भी इस्तीफा दे देंगे। उधर शिंदे ने दावा कर दिया है कि उनकी शिवसेना असली है।

जो स्थिति आज महाराष्ट्र में है वही स्थिति कभी आंध्र प्रदेश में भी हो गई थी। उस वक्त चंद्रबाबू नायडू ने अपने ससुर एनटीआर को धोखा देकर तेलगुदेशम पार्टी (टीडीपी) पर कब्जा कर लिया था। एनटी रामा राव नही तेलगुदेशम पार्टी की स्थापना की थी। प्रधानमंत्री मोदी भी कई रैलियों में चंद्रबाबू नायडू को धोखेबाज बताकर हमला बोल चुके हैं। आइए जानते हैं कि 1995 में आखिर क्या हुआ था जिसके बाद टीडीपी की बागडोर चंद्रबाबू नायडू के हाथों में आ गई।

फिल्मों से फेमस हुए थे एनटी रामाराव
एनटी रामाराव का पूरा नाम था नंदमूरि तारक रामाराव। वह फिल्मों में अभिनय भी करते थे। देवताओं के रोल करके उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली और पसंद किया जाने लगा। इके बाद वह राजनीति में कूदे और टीडीपी पार्टी बना ली। वह कांग्रेस के खिलाफ थे। चंद्रबाबू नाडयू पहले कांग्रेस सरकार में मंत्री थे। राजनीति में रहते हुए ही वह एनटी रामाराव के करीब आए।

एनटीआर की बेटी से की शादी
चंद्रबाबू नायडू ने 1981 में एनटीआर की बेटी भुवनेश्वरी से शादी कर ली। जब राज्य में टीडीपी की सरकार थी तब नायडू उनकी पार्टी में शामिल हो गए और एनटीआर के करीबियों से संपर्क बढ़ाने लगे। एक दशक पार्टी में रहने के बाद चंद्रबाबू नायडू ने टीडीपी में तख्तापलट कर दिया। उन्होंने एनटीआर के खिलाफ विद्रोह कर दिया। कुल 216 विधायकों में से उन्होने 198 विधायक तोड़ लिए और टीडीपी पर कब्जा कर लिया। चंद्रबाबू नायडू मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए।

एनटीआर ने खुद को कहा था शाहजहां
इस तरह धोखा खाने के बाद एनटीआर ने खुद की तुलना मुगल सम्राट शाहजहां से की थी। उन्होंने कहा था कि चंद्रबाबू नायडू ने औरंगजेब की तरह उनकी पीठ में खंडर मारा है। एनटीआर ने कहा था कि उनके खिलाफ जो लोग गए हैं उनसे बदला लेंगे। हालांकि एनटीआर का राजनीतिक जीवन वहीं से खत्म हो गया। एक साल बाद 1996 में ही हार्टअटैक की वजह से एनटीआर का निधन हो गया।