
HIGHLIGHTS: चार दिवसीय अनुष्ठान का श्रीगणेश; सूर्य उपासना के लिए तैयार हुई राजधानी
- महापर्व का आगाज: रविवार (22 मार्च, 2026) को ‘नहाय-खाय’ के साथ शुरू हुआ चैती छठ।
- बाजारों की रौनक: अंटा घाट से मीठापुर तक सजी दुकानें; कद्दू, फल और सूप-दौरा की भारी मांग।
- महंगाई का तड़का: फल और सब्जियों के दाम आसमान पर, कद्दू ₹40 किलो तो केला ₹800 घौद तक पहुँचा।
- मिट्टी की सोंधी खुशबू: पीतल और गैस के युग में भी 150 रुपये में बिक रहा मिट्टी का चूल्हा।
पटना | 22 मार्च, 2026
बिहार की सांस्कृतिक पहचान और लोक आस्था का सबसे बड़ा केंद्र ‘छठ महापर्व’ आज से शुरू हो गया है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी आज रविवार को ‘नहाय-खाय’ के साथ चार दिवसीय चैती छठ का अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। राजधानी पटना की सड़कों पर सुबह से ही ‘कांच ही बांस के बहिनिया…’ की मधुर गूँज और सूप-दौरा लेकर जाते श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आ रही है। हालांकि इस बार महंगाई ने आम आदमी की जेब पर थोड़ा असर जरूर डाला है, लेकिन महापर्व की श्रद्धा के आगे कीमतें गौण साबित हो रही हैं।
अंटा घाट पर ‘कद्दू’ की मांग: ₹40 किलो तक पहुँचे दाम
नहाय-खाय के दिन सबसे अधिक महत्व कद्दू (लौकी), चना दाल और अरवा चावल का होता है। पटना के प्रसिद्ध अंटा घाट बाजार में सुबह से ही व्रतियों की भारी भीड़ देखी गई।
- सब्जियों का हाल: कद्दू की कीमत इस बार 30 से 40 रुपये किलो के बीच बनी हुई है। छोटे कद्दू भी 20 रुपये पीस के हिसाब से बिक रहे हैं।
- अन्य सब्जियां: महापर्व के दौरान इस्तेमाल होने वाली अन्य सब्जियों में कटहल 60-80 रुपये, सहजन 80 रुपये और बैंगन 20 रुपये किलो तक बिक रहा है। महंगाई के बावजूद हर कोई अपनी सामर्थ्य के अनुसार खरीदारी में जुटा है।
मिट्टी के चूल्हे की बढ़ी पूछ: कुम्हारों के चेहरे पर दिखी चमक
छठ का प्रसाद बनाने के लिए आज भी पारंपरिक मिट्टी के चूल्हे का विशेष महत्व है। पटना के मीठापुर, कंकड़बाग और कदमकुआं के बाजारों में कुम्हारों द्वारा बनाए गए चूल्हे हाथों-हाथ बिक रहे हैं।
एक चूल्हे की कीमत इस बार 120 से 150 रुपये के बीच है। कुम्हारों का कहना है कि लकड़ी और मिट्टी के महंगे होने के बावजूद नवरात्रि और छठ के कारण इस बार कारोबार अच्छा है। साथ ही धूप, अगरबत्ती, कपूर और हुमाद जैसी पूजन सामग्री की दुकानों पर भी श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
फल मंडी में ‘तेजी’: नारियल और केला हुआ महंगा
पटना की बाजार समिति, मीठापुर और कदमकुआं फल मंडियों में फलों के दाम ने इस बार पसीने छुड़ा दिए हैं। छठ पूजा के लिए सबसे अनिवार्य फलों की कीमतें कुछ इस प्रकार हैं:
- केला: केले का एक घौद 400 से 800 रुपये तक पहुँच गया है।
- नारियल: पिछले साल जो नारियल 25-40 रुपये में था, वह इस बार 30 से 50 रुपये प्रति पीस बिक रहा है।
- सेब: अच्छी क्वालिटी का सेब 150 से 250 रुपये किलो के बीच है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मांग अचानक बढ़ने और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी की वजह से दामों में यह उछाल आया है।
बांस के सूप और दौरा: शिल्पकारों की मेहनत को मिल रहा दाम
छठ पूजा की पहचान यानी बांस से बने सूप और दौरा के बिना यह पर्व अधूरा है। इस बार सूप की कीमत 50 से 80 रुपये तक है, जबकि दौरा 150 से 300 रुपये में मिल रहा है। दुकानदारों का कहना है कि बांस की कच्ची लागत और कारीगरों की मजदूरी बढ़ने की वजह से पिछले वर्षों की तुलना में कीमतों में 20-30 फीसदी का इजाफा हुआ है।
VOB का नजरिया: क्या ‘आस्था’ पर भारी पड़ेगी महंगाई?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि चैती छठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है। नहाय-खाय के दिन कद्दू-भात का सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रती अपने तन और मन को शुद्ध करते हैं।
हालांकि, बाजारों में फल और सब्जियों की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय हैं। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि महापर्व के दौरान जमाखोरों पर नकेल कसी जाए ताकि कम आय वर्ग के श्रद्धालु भी बिना किसी आर्थिक मानसिक तनाव के पूजा कर सकें। पटना के घाटों पर सुरक्षा और सफाई की व्यवस्था भी इस बार चुनौतीपूर्ण होगी क्योंकि गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ सभी व्रतियों के मंगल भविष्य की कामना करता है।
महापर्व का पूरा शेड्यूल: एक नजर में
- 22 मार्च (रविवार): नहाय-खाय (आज)
- 23 मार्च (सोमवार): खरना (गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद)
- 24 मार्च (मंगलवार): पहला अर्घ्य (अस्ताचलगामी सूर्य को)
- 25 मार्च (बुधवार): दूसरा अर्घ्य (उदीयमान सूर्य को) और पारण


