पटना | 25 फरवरी, 2026: भारत की ‘डिजिटल महाजनगणना’ 2027 को लेकर बिहार में प्रशासनिक मशीनरी ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी है। मंगलवार से राजधानी पटना के शास्त्रीनगर स्थित राजस्व प्रशिक्षण संस्थान में मास्टर ट्रेनरों के पहले बैच का चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शुरू हो गया। इस बार की जनगणना पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि पूरी तरह हाई-टेक और मोबाइल ऐप पर आधारित होगी। बिहार में इस विशाल अभियान को सफल बनाने के लिए 3 लाख से अधिक कर्मियों की फौज उतारी जाएगी।
मास्टर ट्रेनरों के कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी: 140 ‘गुरु’ सिखाएंगे जनगणना के गुर
जनगणना कार्य निदेशालय, बिहार के निदेशक एम रामचंद्रुडू ने प्रशिक्षण सत्र की अध्यक्षता करते हुए बताया कि बिहार में जनगणना की कमान 140 मास्टर ट्रेनरों के हाथ में होगी।
- पहला बैच: फिलहाल 48 मास्टर ट्रेनरों को राष्ट्रीय मॉड्यूल के आधार पर प्रशिक्षित किया जा रहा है।
- चेन सिस्टम: ये मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जिलों में जाकर 3 लाख प्रगणकों (Enumerators) और पर्यवेक्षकों को ट्रेनिंग देंगे।
- महत्व: निदेशक ने स्पष्ट किया कि यदि मास्टर ट्रेनर से कोई चूक हुई, तो उसका असर पूरे जिले के डेटा पर पड़ेगा, इसलिए इसे ‘राष्ट्रीय कर्तव्य’ की तरह सीखने की जरूरत है।
क्या नया है जनगणना 2027 में? जानें 33 बिंदुओं का ‘डिजिटल’ खेल
इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है। सरकार ने इसमें तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया है:
- 33 बिंदुओं पर सर्वे: मकान सूचीकरण और घर-घर सर्वेक्षण के दौरान कुल 33 अलग-अलग पैरामीटर्स पर जानकारी संकलित की जाएगी।
- नो पेपर वर्क: इस बार कंपाइल शीट (कागजी फॉर्म) भरने का झंझट खत्म हो जाएगा। प्रगणक सीधे मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल पर डेटा दर्ज करेंगे।
- स्व-गणना (Self-Enumeration): आम नागरिक भी जनगणना में भागीदारी निभा सकेंगे। मोबाइल ऐप के जरिए लोग खुद अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
- CMMS मॉनिटरिंग: पूरी प्रक्रिया की निगरानी ‘सेन्सस मैनेजमेंट मॉनिटरिंग सिस्टम’ (CMMS) के जरिए की जाएगी, जिससे डेटा में हेराफेरी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
दो चरणों में होगा काम: फरवरी 2027 में असली परीक्षा
जनगणना की प्रक्रिया को दो हिस्सों में बांटा गया है:
- प्रथम चरण: वर्तमान में मकान सूचीकरण (House Listing) और आवास गणना पर ध्यान दिया जा रहा है।
- द्वितीय चरण: जनसंख्या की मुख्य गणना फरवरी 2027 में प्रस्तावित है, जिसके लिए अलग से ट्रेनिंग दी जाएगी।
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा का बयान: “यह राष्ट्र निर्माण का आधार स्तंभ”
उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने इस अभियान को देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल गिनती नहीं है, बल्कि यह भविष्य की विकास नीतियों और संसाधनों के सही वितरण का आधार है। उन्होंने बिहार के कर्मियों से आह्वान किया कि वे इस कार्य में देश के सामने एक ‘आदर्श’ स्थापित करें।
सरल भाषा और संवाद पर जोर
राजस्व विभाग के अपर सचिव श्री राजीव वत्सराज ने मास्टर ट्रेनरों को छात्र की तरह सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जनगणना कर्मियों की भाषा सहज और स्पष्ट होनी चाहिए ताकि आम जनता बिना किसी झिझक के सही जानकारी दे सके। पोर्टल अभी ‘डेवलपिंग स्टेज’ में है, जिसकी ट्रेनिंग समय-समय पर दी जाती रहेगी।
द वॉयस ऑफ बिहार का नजरिया: जनगणना 2027 बिहार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। 3 लाख कर्मियों को डिजिटल मोड में सटीक डेटा के लिए तैयार करना एक बड़ा टास्क है। अगर तकनीक और पारदर्शिता का सही तालमेल रहा, तो यह डेटा बिहार के विकास की अगली पटकथा लिखने में मील का पत्थर साबित होगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


