मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने तृणमूल कांग्रेस की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी तरह कानून के दायरे में होगी. चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने स्पष्ट किया है कि जो भी कानून हाथ में लेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
सूत्रों का दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के विनम्र रवैये के बावजूद ममता बनर्जी ने बैठक के दौरान झूठे आरोप लगाए, ऊंची आवाज में बात की, टेबल ठोकी और नाराज होकर चली गईं.
CEC ने दिया ममता के सवालों का जवाब
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CEC ने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक दायरे में रहकर काम करेगा और कानूनी अधिकारों के तहत ही सभी फैसले लिए जाएंगे. सूत्रों ने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी के कुछ विधायक और कार्यकर्ता चुनाव आयोग तथा विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं.
आयोग के मुताबिक कई स्थानों पर चुनाव अधिकारियों को धमकाने और ईआरओ कार्यालयों में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं. आयोग ने कहा कि ऐसी किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
SIR प्रक्रिया में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं
चुनाव आयोग के सूत्रों ने जोर देकर कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े अधिकारियों पर किसी भी तरह का दबाव या रुकावट स्वीकार नहीं की जाएगी. आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के मानदेय का मुद्दा भी उठाया और बताया कि 18 हजार रुपये में से अब तक केवल 7 हजार रुपये ही जारी किए गए हैं.
इसके अलावा तहसीलदार और एसडीएम स्तर के अधिकारियों को ईआरओ और एईआरओ के रूप में तैनात करने की मांग की गई है. आयोग के अनुसार 20 जनवरी को सामान्य प्रशासन से रिटर्निंग अधिकारियों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव मांगा गया था, लेकिन फिलहाल केवल 67 विधानसभा क्षेत्रों में ही एसडीओ/एसडीएम रैंक के अधिकारी तैनात हैं.
ममता ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा,
“मैं बहुत दुखी हूं. दिल्ली में लंबे समय से राजनीति में हूं, चार बार मंत्री और सात बार सांसद रही हूं, लेकिन इतना अहंकारी और झूठा चुनाव आयुक्त कभी नहीं देखा.”
ममता ने आगे कहा,
“मैंने उन्हें बताया कि मैं आपकी कुर्सी का सम्मान करती हूं, लेकिन कोई कुर्सी स्थायी नहीं होती. बंगाल को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? चुनाव लोकतंत्र का त्योहार है, लेकिन आपने 58 लाख लोगों के नाम सूची से हटा दिए और उन्हें सफाई का मौका तक नहीं दिया.”


