पटना। बिहार में सरकारी शिक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, अनुशासित और पारदर्शी बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने एक बड़ी पहल की है। राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों की कक्षाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की योजना को नए साल से लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह योजना करीब 14 महीने पहले प्रस्तावित की गई थी।
वित्त विभाग को भेजा गया प्रस्ताव
शिक्षा विभाग ने इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन के लिए वित्त विभाग को आवश्यक बजट प्रावधानों के साथ प्रस्ताव भेज दिया है। प्रस्ताव के अनुसार प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
सुरक्षा और निगरानी होगी मजबूत
सीसीटीवी कैमरों के जरिए कक्षाओं में शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी के साथ-साथ शिक्षकों और छात्रों की सुरक्षा, स्कूलों में अनुशासन और मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal Scheme) के क्रियान्वयन पर भी नजर रखी जाएगी।
पहले चरण में 12वीं कक्षा
सूत्रों के अनुसार, योजना के पहले चरण में उच्च माध्यमिक विद्यालयों की 12वीं कक्षाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके बाद 8वीं, 9वीं, 10वीं और 11वीं कक्षाओं में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। अंततः प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में भी चरणबद्ध रूप से कैमरे लगाए जाएंगे।
हजारों स्कूलों में लगेगा CCTV
राज्य में कुल 9,360 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय, 40,566 प्राथमिक विद्यालय और 31,297 मध्य विद्यालय हैं। इन सभी विद्यालयों की कक्षाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि हर स्कूल में निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
खर्च को देखते हुए चरणबद्ध योजना
सीसीटीवी कैमरे लगाने में आने वाले अधिक खर्च को देखते हुए निचली कक्षाओं में इसे धीरे-धीरे लागू किया जाएगा, ताकि बजट पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और योजना को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।
तकनीकी तैयारियां अंतिम चरण में
फिलहाल शिक्षा विभाग तकनीकी विशेषज्ञों और प्रबंधकों के साथ मिलकर योजना के क्रियान्वयन की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। प्रत्येक विद्यालय में बिजली, नेटवर्क कनेक्टिविटी और तकनीकी जांच के बाद कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही शिक्षकों और प्रशासनिक कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
पायलट प्रोजेक्ट में मिले सकारात्मक परिणाम
योजना को लागू करने से पहले कुछ स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत परीक्षण किया गया, जिसमें सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसके आधार पर ही पूरे राज्य में इसे लागू करने का निर्णय लिया गया है।
शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से न केवल स्कूलों में सुरक्षा और अनुशासन बढ़ेगा, बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होगा। यह कदम बिहार की सरकारी शिक्षा प्रणाली को आधुनिक, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।


