पटना: बिहार सरकार के खेल विभाग के लिए वर्ष 2025 उपलब्धियों, नीतिगत सुधारों और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजनों की दृष्टि से एक ऐतिहासिक वर्ष के रूप में दर्ज हुआ है। इस वर्ष राज्य ने खेल अवसंरचना के विस्तार, प्रतिभा विकास, खेल प्रशासन में सुधार और बड़े आयोजनों की सफल मेजबानी के माध्यम से राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। इन्हीं उपलब्धियों की मजबूत नींव पर खेल विभाग नववर्ष 2026 में नई ऊर्जा, स्पष्ट दृष्टि और दूरदर्शी योजनाओं के साथ आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
वर्ष 2025 के दौरान खेल विभाग को सशक्त नेतृत्व का मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। श्री महेन्द्र कुमार ने खेल विभाग के सचिव के रूप में पदभार ग्रहण किया, जबकि श्री आरिफ अहसन ने निदेशक, खेल के रूप में कार्यभार संभाला। उनके नेतृत्व में विभाग ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और संस्थागत सुदृढ़ीकरण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की सफल मेजबानी
वर्ष 2025 में बिहार ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स, हीरो एशिया कप (मेन्स हॉकी), एशियाई रग्बी सेवेंस अंडर-20 तथा ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज एथलेटिक्स चैंपियनशिप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन कर यह सिद्ध किया कि राज्य बड़े स्तर के खेल आयोजनों के लिए पूर्णतः सक्षम है। इन आयोजनों ने बिहार की प्रशासनिक दक्षता, खेल सुविधाओं और आयोजन क्षमता को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया।
खेल अवसंरचना को मिला नया आयाम
खेल अवसंरचना के क्षेत्र में भी वर्ष 2025 एक मील का पत्थर साबित हुआ। राजगीर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का शुभारंभ हुआ, वहीं मनरेगा के अंतर्गत 257 प्रखंड स्तरीय आउटडोर स्टेडियमों का निर्माण पूर्ण किया गया। इसके अतिरिक्त राजगीर, पटना एवं राज्य के अन्य प्रमुख केंद्रों में आधुनिक खेल सुविधाओं के विकास से बिहार एक उभरते हुए खेल गंतव्य के रूप में सामने आया है।
प्रतिभा पहचान और खिलाड़ी विकास पर विशेष फोकस
खिलाड़ी विकास के क्षेत्र में वर्ष 2025 अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। खेल अकादमियों, प्रशिक्षण शिविरों और प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभाओं की पहचान एवं तैयारी पर विशेष ध्यान दिया गया। छात्रवृत्ति योजनाओं और प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार से खिलाड़ियों को निरंतर प्रोत्साहन मिला। खेल प्रशासन में पारदर्शिता और संस्थागत मजबूती लाने के लिए कई संरचनात्मक सुधार भी लागू किए गए।
राज्य में प्रतिभा पहचान को नई गति देते हुए मशाल—भारत के सबसे बड़े टैलेंट आइडेंटिफिकेशन प्रोग्राम—के तहत 34,000 विद्यालयों में 42 लाख से अधिक विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों से जोड़ा गया। एकलव्य स्पोर्ट्स स्कूल योजना के अंतर्गत 23 खेल विधाओं में 60 से अधिक विद्यालय स्थापित किए गए, जिनमें प्रत्येक जिले में न्यूनतम एक विद्यालय सुनिश्चित किया गया है। इसके अतिरिक्त खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, राजगीर (KISCE) तथा 38 लघु प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से खिलाड़ियों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।
समावेशी खेल शासन और खिलाड़ी कल्याण
खेल शासन के लोकतंत्रीकरण और समावेशिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंचायत क्लब नीति के अंतर्गत 8,053 पंचायतों में खेल क्लबों का पंजीकरण किया गया, जिससे महिला-केंद्रित खेल नेतृत्व को भी प्रोत्साहन मिला है। खिलाड़ियों के लिए 360-डिग्री सहयोग तंत्र के रूप में स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप पॉलिसी, मेडल लाओ–नौकरी पाओ योजना, खिलाड़ी कल्याण कोष, खेल सम्मान समारोह तथा महिला खिलाड़ियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण हेतु विशेष नीति लागू की गई है।
इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि बिहार के युवा खिलाड़ियों ने हाई जंप, सेपाकतकरॉ, साइक्लिंग, फेंसिंग, शतरंज, तैराकी, तीरंदाज़ी एवं पैरा-एथलेटिक्स जैसी विधाओं में विश्व एवं एशिया स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन कर राज्य का गौरव बढ़ाया।
नववर्ष 2026: नए लक्ष्य, नई दिशा
नववर्ष 2026 में खेल विभाग नई ऊर्जा और स्पष्ट दृष्टि के साथ आगे बढ़ेगा। सात निश्चय योजना (03) के अंतर्गत राजधानी पटना में एक अत्याधुनिक स्पोर्ट्स सिटी की स्थापना की जाएगी, जिसका कार्य वर्ष 2026 से प्रारंभ होगा। इसके साथ ही राज्य के सभी जिलों में क्षेत्र-विशेष में लोकप्रिय खेलों के अनुरूप सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना है, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
राज्य में 64 एकलव्य खेल केंद्र वर्ष 2026 से क्रियाशील किए जाएंगे, जो ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों की प्रतिभाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। खेल छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत प्रेरणा, उत्थान एवं उत्कर्ष श्रेणियों के लिए नए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे, जिससे अधिक से अधिक खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिल सके।
इसके अतिरिक्त बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC), बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) एवं बिहार स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (BSSC) के माध्यम से बड़े पैमाने पर नियुक्तियाँ की जाएंगी, जिससे खेल प्रशासन एवं प्रशिक्षण व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
दीर्घकालिक दृष्टि की ओर अग्रसर बिहार
बिहार विकसित भारत 2047 एवं गौरवशाली बिहार 2047 के दीर्घकालिक लक्ष्य के अनुरूप 2036 ओलंपिक विज़न में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2025 की उपलब्धियाँ इस परिवर्तन यात्रा की मजबूत नींव हैं और वर्ष 2026 खेल प्रतिभाओं, अवसरों, अवसंरचना एवं सुशासन—इन चारों स्तंभों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का वर्ष सिद्ध होगा।


