नवादा | 24 फरवरी, 2026: बिहार के नवादा जिले से मानवता और रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक खबर सामने आई है। यहाँ एक 8 माह की गर्भवती महिला के साथ उसके ही चचेरे भैसुर ने दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया है। इस घटना ने न केवल इलाके में सनसनी फैला दी है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर होने वाले न्याय के तरीकों (पंचायत) पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
शौच के लिए गई महिला को अकेला पाकर बनाया शिकार
वारदात की शुरुआत उस समय हुई जब महिला गांव में अकेले होने का दंश झेल रही थी:
- घटनाक्रम: पीड़िता जब घर से बाहर शौच के लिए गई थी, तब आरोपी चचेरे भैसुर ने उसे अकेला पाकर घेर लिया।
- हैवानियत: आरोप है कि आरोपी ने महिला को जमीन पर पटक दिया और उसके साथ बलात्कार किया।
- पीड़िता की स्थिति: महिला पहले से ही एक बच्चे की मां है और वर्तमान में 8 माह की गर्भवती है।
पंचायत रही विफल: पति के दिल्ली से लौटने पर शुरू हुई कानूनी लड़ाई
घटना के बाद पीड़िता ने तुरंत अपने ससुर को आपबीती सुनाई, लेकिन न्याय का रास्ता आसान नहीं था:
- पति की वापसी: घटना के वक्त महिला का पति दिल्ली में मजदूरी कर रहा था, जो सूचना मिलते ही तुरंत गांव लौटा।
- पंचायत का ड्रामा: मामले को दबाने या सुलझाने के लिए गांव में पंचायत बुलाई गई, लेकिन पंचायत में महिला को कोई ठोस न्याय नहीं मिल सका।
- पीड़िता की हिम्मत: पंचायत के विफल होने के बाद, महिला ने खुद हिम्मत जुटाई और सीधे नगर थाना पहुँचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई: फॉरेंसिक जांच और मेडिकल पुष्टि
नगर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कदम उठाए हैं:
- FIR दर्ज: थाना प्रभारी उमाशंकर सिंह ने पुष्टि की है कि महिला की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
- मेडिकल जांच: नवादा सदर अस्पताल में कराई गई मेडिकल जांच में महिला की 8 माह की गर्भावस्था की पुष्टि हुई है।
- वैज्ञानिक साक्ष्य: पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को भी घटनास्थल पर भेजकर साक्ष्य संकलित किए हैं।
आरोपी फरार: पुलिस की छापेमारी जारी
दुष्कर्म की इस वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मोबाइल बंद कर गांव छोड़कर फरार हो गया है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।
द वॉयस ऑफ बिहार की रिपोर्ट: गर्भवती महिला के साथ ऐसी हैवानियत समाज के लिए एक बड़ा कलंक है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ पीड़िता के साहस को सलाम करता है जिसने पंचायत के दबाव के आगे झुकने के बजाय कानून का दरवाजा खटखटाया।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


