जफरा में हैवानियत! मां ने जन्म लेते ही नवजात को रेत में फेंका, गांव वालों ने बचाई जान — पुलिस तलाश में जुटी

भागलपुर। कहलगांव अनुमंडल के जफरा गांव से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक मां ने अपनी नवजात बच्ची को जन्म देने के कुछ ही मिनटों बाद सड़क किनारे रेत के ढेर में फेंक दिया। मासूम रेत में आधी दबी हुई पड़ी थी।

संयोग से गांव के कुछ लोगों की नजर बच्ची पर पड़ी, वरना उसकी जान बचना मुश्किल था।


स्थानीय लोगों की सतर्कता से बची जान, पुलिस और एंबुलेंस को दिया गया सूचना

घटना सुबह उस समय सामने आई जब ग्रामीणों ने सड़क किनारे रेत में हलचल देखी। नजदीक जाकर देखा तो नवजात बच्ची रो रही थी और उसका शरीर रेत से ढका हुआ था।

ग्रामीणों ने तुरंत 112 पुलिस को फोन किया और बच्ची को कपड़े में लपेटकर अस्पताल ले जाया गया।

सनोखर पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को कहलगांव अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया।


डॉक्टर बोले— बच्ची स्वस्थ, बाल संरक्षण इकाई को सौंपी जाएगी

अस्पताल प्रभारी डॉ. पवन कुमार ने बताया—
“बच्ची की हालत फिलहाल स्थिर है। उसका पूरी तरह इलाज और निगरानी की जा रही है। मामले की सूचना जिला बाल संरक्षण इकाई को दे दी गई है।”

बाल संरक्षण इकाई की टीम बच्ची को संरक्षण में लेगी और फिर नियमानुसार उसे भागलपुर बाल गृह भेजा जाएगा।


इलाके में सनसनी — लोग बोले, ‘मां इतनी निर्दयी कैसे हो सकती है?’

घटना की खबर फैलते ही जफरा गांव में सनसनी फैल गई।
ग्रामीणों ने मां की इस हरकत को अत्यंत अमानवीय बताते हुए कहा—

“एक मां तो बच्चे के लिए जान दे देती है, यहां मां ही दुश्मन बन बैठी! यह समाज के लिए खतरे की घंटी है।”

कई लोगों ने कहा कि यदि बच्ची को नहीं रखना चाहती थी तो किसी सुरक्षित जगह, अस्पताल या संस्था को सौंप सकती थी। रेत में फेंकना क्रूरता की हद है।


पुलिस नवजात को फेंकने वाली महिला की तलाश कर रही है

पुलिस आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ कर रही है। माना जा रहा है कि महिला ने कहीं नजदीक ही बच्ची को जन्म दिया और तुरंत छोड़कर चली गई।

पुलिस ने कहा—
“फिलहाल बच्ची सुरक्षित है। आरोपी महिला का पता लगाया जा रहा है, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।”


घटना ने समाज को आईना दिखाया — बेटियों के प्रति भेदभाव पर नए सिरे से सवाल

यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज में बेटियों को लेकर फैली असंवेदनशीलता और भेदभाव पर बड़ा सवाल है।
लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएँ आधुनिक समाज के लिए चिंताजनक संकेत हैं।

फिलहाल मासूम सुरक्षित है और प्रशासन उसके भविष्य की जिम्मेदारी संभाल रहा है।


 

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