भागलपुर में ईंट भट्ठा व्यवसायियों को जीएसटी के नए प्रावधानों को लेकर सख्त संदेश दिया गया है। वाणिज्य-कर विभाग ने साफ कर दिया है कि शून्य कर भुगतान दिखाने वाले भट्ठा मालिकों पर अब कड़ी नजर रहेगी और गड़बड़ी मिलने पर विधिक कार्रवाई तय है।
राज्य-कर संयुक्त आयुक्त सुश्री मिन्नी की अध्यक्षता में वाणिज्य-कर कार्यालय के सभागार में भागलपुर अंचल-1 के तहत भागलपुर और बांका जिले के ईंट भट्ठा व्यवसायियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जीएसटी के बदले हुए नियमों की विस्तार से जानकारी दी गई।
दो विकल्प बताए गए – 12% टैक्स या 6% बिना ITC
अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में ईंट भट्ठा व्यवसायियों के लिए दो तरह की टैक्स स्लैब लागू हैं।
- 12 प्रतिशत जीएसटी भुगतान करने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लिया जा सकता है।
- वहीं, बिना ITC के 6 प्रतिशत जीएसटी भुगतान का विकल्प भी उपलब्ध है।
कोयले की कम खरीद पर उठा सवाल
बैठक में विभाग ने चिंता जताई कि पिछले वर्ष की तुलना में इस साल कई भट्ठा व्यवसायियों ने कोयले की खरीद कम दिखाई है, जबकि ईंट निर्माण में कोयला एक जरूरी कच्चा माल है। इससे आशंका है कि कुछ कारोबारी वास्तविक उत्पादन और टर्नओवर छिपाकर टैक्स से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि जो व्यवसायी वास्तविक कोयला खरीद और सही टर्नओवर दिखाएंगे, उन्हें वैध रूप से ITC का लाभ मिलेगा और विभागीय कार्रवाई से बचा जा सकेगा।
30 भट्ठा मालिकों पर जांच, शून्य टैक्स पर सख्ती
विभाग ने जानकारी दी कि फिलहाल करीब 30 ईंट भट्ठा व्यवसायियों द्वारा शून्य कर भुगतान दिखाया गया है, जिनकी गहन जांच की जा रही है। जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित व्यवसायियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी और व्यवसायी रहे मौजूद
बैठक में राज्य-कर उपायुक्त अजय कुमार पंडित, राज्य-कर सहायक आयुक्त आकाश आनंद, ईंट भट्ठा व्यवसायी संघ के पदाधिकारी और लगभग 30 ईंट भट्ठा व्यवसायी शामिल हुए।
वाणिज्य-कर विभाग ने साफ कर दिया है कि अब ईंट भट्ठा कारोबार में पारदर्शिता जरूरी है। गलत आंकड़े दिखाकर टैक्स से बचने वालों पर सख्ती तय है।


