खबर के मुख्य बिंदु:
- दोहरी सफलता: 68वीं BPSC में 10वीं रैंक लाने वाली मीमांसा ने अब UPSC 2025 में हासिल की 447वीं रैंक।
- वर्दी और पढ़ाई: पूर्णिया में ‘एडिशनल कमिश्नर’ (सेल्स टैक्स) के पद पर तैनात रहते हुए पाई कामयाबी।
- जड़ें: मूल रूप से कटिहार की बेटी, भागलपुर के जीरोमाइल (चाणक्या विहार) में बस गया है परिवार।
- शिक्षा का सफर: माउंट असीसी भागलपुर से स्कूलिंग, फिर DU और JNU से उच्च शिक्षा।
भागलपुर: कहते हैं कि अगर मंजिल पाने की जिद हो, तो व्यस्तता और जिम्मेदारियां कभी रुकावट नहीं बनतीं। बिहार के भागलपुर की बेटी मीमांसा ने इस कहावत को हकीकत में बदल दिया है। शुक्रवार को घोषित संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के नतीजों में 447वीं रैंक हासिल कर मीमांसा ने साबित कर दिया कि ‘बिहारी मेधा’ किसी भी परिस्थिति में अपना रास्ता बना लेती है। उनकी इस सफलता से भागलपुर के जीरोमाइल स्थित चाणक्या विहार कॉलोनी में जश्न का माहौल है।
BPSC से UPSC तक: सफलता की ‘हैट्रिक’
मीमांसा की यह कोई पहली बड़ी जीत नहीं है। इससे पहले उन्होंने 68वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में पूरे राज्य में 10वां स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। वर्तमान में वे पूर्णिया जिले में सेल्स टैक्स के अतिरिक्त आयुक्त (Additional Commissioner) जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात हैं। एक जिम्मेदार पद की व्यस्तताओं के बीच यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा निकालना युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है।
सफलता का मूल मंत्र: ‘टाइम मैनेजमेंट’ और ‘सेल्फ स्टडी’
अक्सर छात्र कोचिंग और बड़े संस्थानों के पीछे भागते हैं, लेकिन मीमांसा की कहानी अलग है।
- खुद पर भरोसा: बीपीएससी की तरह ही यूपीएससी के लिए भी उन्होंने किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया और पूरी तरह ‘सेल्फ स्टडी’ पर निर्भर रहीं।
- वक्त की कीमत: ड्यूटी के साथ पढ़ाई को मैनेज करना सबसे बड़ी चुनौती थी। मीमांसा के अनुसार, सटीक टाइम मैनेजमेंट ही उनकी जीत की असली कुंजी है।
शिक्षा और परिवार: ‘कटिहार’ से ‘पटना’ और ‘दिल्ली’ का सफर
मीमांसा का परिवार मूल रूप से कटिहार जिले के कोढ़ा (देहरी) का रहने वाला है, लेकिन वर्षों से भागलपुर उनका स्थायी घर बन चुका है।
- शुरुआती शिक्षा: भागलपुर के प्रतिष्ठित माउंट असीसी स्कूल से प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की।
- उच्च शिक्षा: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से स्नातक और फिर जेएनयू (JNU) से पोस्ट ग्रेजुएशन कर अपनी बौद्धिक क्षमता को निखारा।
- पारिवारिक सहयोग: पिता मिथिलेश कुमार यादव (सेवानिवृत्त सरकारी सेवक) और मां कंचन देवी ने हमेशा बेटी के सपनों को पंख दिए।
VOB का नजरिया: नौकरी पेशा युवाओं के लिए मिसाल
मीमांसा की सफलता यह संदेश देती है कि अगर आपका ‘विजन’ साफ है, तो आप नौकरी करते हुए भी देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में जा सकते हैं। अक्सर लोग जॉब मिलने के बाद संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन मीमांसा का निरंतर प्रयास और आगे बढ़ने की भूख उन्हें एक बेहतरीन प्रशासनिक अधिकारी (IAS) बनाएगी। भागलपुर और कटिहार की यह बेटी आज बिहार की लाखों लड़कियों के लिए रोल मॉडल बन चुकी है।


