
समस्तीपुर (बिहार): बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित एईडीओ परीक्षा के दौरान समस्तीपुर जिले में हाई-टेक नकल का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कड़ी सुरक्षा और जैमर जैसी तकनीक के बावजूद दो अभ्यर्थियों को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया। इस घटना ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह दिखाया है कि नकल के तरीके अब तकनीक के साथ तेजी से बदल रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले के दो अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से अभ्यर्थियों को पकड़ा गया। पहला मामला नगर थाना क्षेत्र के आरएसबी इंटर हाई स्कूल का है, जहां दूसरी पाली की परीक्षा के दौरान सत्यजीत कुमार नामक अभ्यर्थी की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। जब उसकी गहन जांच की गई तो अधिकारियों के होश उड़ गए। उसके कान के अंदर बेहद छोटा ब्लूटूथ डिवाइस छिपा हुआ मिला, जिसे सामान्य जांच के दौरान पकड़ पाना लगभग असंभव था।
दूसरी घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के श्री कृष्ण हाई स्कूल, जितवारपुर की है, जहां पहली पाली में अरविंद कुमार राय नामक अभ्यर्थी को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि वह उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले का निवासी है। दोनों ही मामलों में केंद्राधीक्षकों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस को सूचना दी और आरोपियों को हिरासत में सौंप दिया।
जांच में सामने आया है कि अभ्यर्थियों ने ‘नैनो ब्लूटूथ’ डिवाइस का इस्तेमाल किया था, जो आकार में चावल के दाने जितना छोटा होता है। इसे कान के अंदर इतनी गहराई में डाला गया था कि बाहर से देखने पर बिल्कुल भी नजर नहीं आता। इसके साथ ही एक ट्रांसमीटर डिवाइस को कपड़ों के अंदर—जैसे कॉलर या बनियान में—छिपाकर रखा गया था। परीक्षा के बाहर बैठा कोई व्यक्ति मोबाइल के जरिए उत्तर बता रहा था, जिसे अभ्यर्थी इस डिवाइस के माध्यम से सुन रहे थे।
हैरानी की बात यह है कि परीक्षा के लिए जिले के सभी 31 केंद्रों पर जैमर लगाए गए थे, ताकि किसी भी तरह के वायरलेस सिग्नल को रोका जा सके। इसके बावजूद इस तरह की सेंधमारी होना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ अत्याधुनिक डिवाइस लो-फ्रीक्वेंसी सिग्नल या वैकल्पिक तकनीकों के जरिए सीमित दूरी में काम कर सकते हैं, जिससे जैमर भी पूरी तरह प्रभावी नहीं रह पाते।
दोनों मामलों में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और आरोपियों से पूछताछ जारी है। प्रशासन को आशंका है कि यह किसी संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जो इस तरह के उपकरणों के जरिए अभ्यर्थियों को नकल कराने में मदद करता है। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है।
इस घटना ने स्वास्थ्य से जुड़े खतरे की ओर भी ध्यान खींचा है। डॉक्टरों के अनुसार, कान के अंदर इस तरह का डिवाइस डालना बेहद जोखिम भरा होता है। इससे कान के पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है, संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है और कई मामलों में सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। यदि डिवाइस कान में फंस जाए तो उसे निकालने के लिए सर्जरी तक करनी पड़ सकती है।
परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए अब प्रशासन और आयोग दोनों सतर्क हो गए हैं। यह माना जा रहा है कि भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, जिसमें बायोमेट्रिक जांच, उन्नत स्कैनिंग तकनीक और कड़ी निगरानी शामिल हो सकती है। केवल जैमर और सामान्य जांच से अब इस तरह की हाई-टेक नकल को रोकना चुनौती बनता जा रहा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कदाचार मुक्त परीक्षा कराना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की नकल या धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पकड़े गए अभ्यर्थियों के खिलाफ कदाचार अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है और उन्हें परीक्षा से निष्कासित कर दिया गया है।
समस्तीपुर की यह घटना केवल एक नकल का मामला नहीं, बल्कि यह संकेत है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल किस तरह शिक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जरूरी है कि सुरक्षा व्यवस्था को समय के साथ अपडेट किया जाए और सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि मेहनती और योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो सके।


