रिकॉर्ड आवेदन के बावजूद AEDO परीक्षा रद्द, BPSC का बड़ा फैसला; पेपर लीक से इनकार, ‘शुचिता’ को बताया वजह

पटना, 2 मई 2026। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा को लेकर बड़ा और सख्त फैसला सामने आया है। आयोग ने रिकॉर्ड 10.97 लाख आवेदनों वाली इस परीक्षा को रद्द कर दिया है। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आयोग ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि न तो पेपर लीक हुआ और न ही प्रश्न पत्र का कोई प्रमाणित प्रसार हुआ। इसके बावजूद परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया, जिसने अभ्यर्थियों और शिक्षा जगत में नई बहस छेड़ दी है।

यह परीक्षा राज्य में अब तक की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जा रही थी। 935 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा में भारी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा का आयोजन 14 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच किया गया था, जिसमें बिहार के सभी 38 जिलों में कुल 746 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इतने बड़े पैमाने पर आयोजित परीक्षा के दौरान व्यवस्थाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर आयोग पर बड़ी जिम्मेदारी थी।

परीक्षा के दौरान ही सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पेपर लीक और अनियमितताओं की खबरें सामने आने लगी थीं। कई केंद्रों पर परीक्षा की शुचिता भंग होने की आशंका जताई गई। हालांकि, BPSC ने शुरू से ही पेपर लीक की बात को खारिज किया और कहा कि कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है जो इस आरोप की पुष्टि करता हो।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की विशेष टीम (SIT) को सौंप दी गई। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया और कदाचार के आरोप में 32 अभ्यर्थियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इन अभ्यर्थियों को भविष्य की परीक्षाओं में शामिल होने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।

आयोग के सचिव सत्य प्रकाश शर्मा ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी ‘साई एजुकेयर’ को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया। इस एजेंसी को भविष्य में किसी भी परीक्षा प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। यह निर्णय इस बात का संकेत है कि आयोग परीक्षा संचालन में किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।

इसके बावजूद, सबसे बड़ा सवाल यह बना रहा कि जब पेपर लीक का कोई प्रमाण नहीं मिला, तो फिर परीक्षा रद्द क्यों की गई? इस पर BPSC ने अपनी सफाई में कहा कि भले ही प्रश्न पत्र लीक होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला, लेकिन कुछ परीक्षा केंद्रों पर कदाचार और अनुशासनहीनता के ऐसे मामले सामने आए, जिन्होंने परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को प्रभावित किया।

आयोग ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों, दर्ज की गई प्राथमिकी और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों से यह स्पष्ट हुआ कि कुछ स्थानों पर परीक्षा की शुचिता को भंग करने की कोशिश की गई थी। ऐसे में पूरे परीक्षा परिणाम को प्रभावित होने से बचाने के लिए यह जरूरी हो गया कि परीक्षा को रद्द किया जाए।

BPSC ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि अभ्यर्थियों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए और भविष्य में पूरी तरह कदाचारमुक्त व पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। आयोग ने यह भी कहा कि यह फैसला कठिन जरूर है, लेकिन निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक था।

इसके साथ ही, 23 अप्रैल को आयोजित सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी की लिखित परीक्षा को भी रद्द कर दिया गया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि आयोग अब किसी भी तरह की शंका या विवाद को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।

इस फैसले के बाद अभ्यर्थियों में नाराजगी भी देखी जा रही है। लाखों उम्मीदवारों ने इस परीक्षा के लिए महीनों तक तैयारी की थी और परीक्षा देने के बाद परिणाम का इंतजार कर रहे थे। अचानक परीक्षा रद्द होने से उनके प्रयासों पर पानी फिर गया है। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर कुछ केंद्रों पर गड़बड़ी हुई थी, तो केवल उन केंद्रों की परीक्षा रद्द की जानी चाहिए थी, पूरे राज्य की नहीं।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े स्तर की परीक्षाओं में यदि कहीं भी निष्पक्षता पर सवाल उठता है, तो पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। ऐसे में आयोग का यह कदम लंबी अवधि में पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए जरूरी हो सकता है।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि BPSC इस परीक्षा को दोबारा कब आयोजित करेगा और क्या इस बार अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। आयोग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है कि वह अभ्यर्थियों का भरोसा फिर से जीत सके और यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

कुल मिलाकर, AEDO परीक्षा रद्द करने का यह फैसला बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर एक बड़ा संदेश देता है। यह साफ है कि आयोग अब किसी भी प्रकार के कदाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है, चाहे इसके लिए उसे कितना ही कठिन निर्णय क्यों न लेना पड़े।

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